Home
Class 6
HINDI
अनुच्छेद 3 अंगुलिमाल एक भयंकर डाकू था।...

अनुच्छेद 3
अंगुलिमाल एक भयंकर डाकू था। वह स्वभाव का इतना क्रूर था कि उसे किसी पर दया नहीं आती थी। मानव हत्या करना उसके लिए एक खेल के समान था। उसने अपने जीवन में एक हजार व्यक्तियों की हत्या करने की प्रतिज्ञा कर रखी थी। वह जिस व्यक्ति की हत्या करता था। उसकी एक अंगुली काट लेता था। इन अँगुलियों की माला बनाकर उसने गले में लटका रखी थी। उस समय श्रावस्ती में राजा प्रसेनजित राज्य करते थे। वह महात्मा बुद्ध के शिष्य थे। एक बार महात्मा बुद्ध श्रावस्ती पहुँचे। राजा ने उनका स्वागत किया, परन्तु महात्मा बुद्ध ने राजा को चिन्तित देखा। उन्होंने इसका कारण पूछा तो राजा ने बताया कि यहाँ डाकू अंगुलिमाल ने भारी उत्पात मचा रखा है। प्रजा बड़ी त्रस्त है। क्या करूँ कुछ समझ में नहीं आता। यह सुनकर महात्मा बुद्ध ने अंगुलिमाल से मिलने का निश्चय कर लिया। राजा ने उन्हें समझाया कि वह बड़ा भयानक डाकू है। वह आपको भी मार देगा।
'क्रूर' का विलोम शब्द होगा

A

निर्दय

B

राक्षस

C

दयाहीन

D

उपरोक्त में से कोई नहीं

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
B

दिए गए सभी शब्द क्रूर के पर्यायवाची हैं अत: विकल्प (d) सही है।
Promotional Banner