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Class 6
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अनुच्छेद 3 बहादुरशाह की विदा की सवारी...

अनुच्छेद 3
बहादुरशाह की विदा की सवारी दिल्ली से निकल रही थी। सड़क पर अपार भीड़ थी। दिल्ली की गलियाँ और कूचे सूने हो गए थे। लाखों आँखें सम्राट के पीले मुख पर जमा हुई थीं। एक-एक आँख से आँसुओं की धारा बही चली जा रही थी, सहस्रो आँखों के आँसू बहादुरशाह की एक-एक आँख में भरे थे। उनके धूलि-धूसरित मुख पर खिची हुई वेदना की काली लहरें चारों ओर शोक का प्रलय बरसा रही थी। दिल्ली रो रही थी। दिल्ली के लोग रो रहे थे और बहादुरशाह उजड़ी राजधानी का बन्दी बादशाह सदा के लिए चला जा रहा था। अपने देश 'से दूर, जहाँ उसका अपना कोई न था। दिल्ली से रंगून ले जाकर वह तंग व अन्धेरी कोठरी में डाल दिया गया। वह दिनभर अपनी कोठरी में पड़ा-पड़ा हुक्का गुड़गुड़ाया करता था। न वह किसी से बोलता था न उससे कोई बोलता था।
दिल्ली के लोग रो रहे थे

A

प्रतिकूल स्थिति देखकर

B

बन्दी बादशाह की विदाई देखकर

C

शाही सवारी देखकर

D

बहादुरशाह का पीला मुख देखकर

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
B
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