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Class 6
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भारतीय संस्कृति में परोपकार को शुभ कार्य...

भारतीय संस्कृति में परोपकार को शुभ कार्य और परम धर्म माना जाता है। भारतीय ऋषि-मुनि जंगलों में तपस्वियों-सा जीवन बिताते थे और समय-समय पर यज्ञ किया करते थे। इसके मूल में परोपकार की भावना निहित थी। नदी-तालाब अपना पानी स्वयं नहीं पीते हैं, वृक्ष अपना फल स्वयं नहीं खाते हैं। ऐसा करके वे परोपकार में निरत रहते हैं। इसके अलावा फूल अपने लिए नहीं खिलते और न मधुमक्खियाँ अपने लिए शहद बनाती हैं। ऐसा करके वे मनुष्य को परोपकार की सीख देती हैं।
भारतीय समाज में ऐसी व्यवस्थाएँ मिलती हैं, जो परोपकार करने के लिए प्रेरित करती हैं। भूखे को भोजन देना, ग्रीष्मऋतु में यात्रियों को पानी पिलाना, कुएँ-बावड़ी बनवाना, सराय बनवाना, पेड़ लगाना परोपकार के कार्य आदि हैं। हमें भी परोपकार करके पुण्य कमाना चाहिए।
किसके मूल में परोपकार की भावना निहित थी?

A

दान देना में

B

ऋषि-मुनियों द्वारा समय-समय पर यह

C

धार्मिक कार्य करने में

D

जंगल में तपस्या करने में

लिखित उत्तर

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The correct Answer is:
B
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