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मंगल पाण्डे की क्रान्ति से सम्बन्धित इस ...

मंगल पाण्डे की क्रान्ति से सम्बन्धित इस आहान को सुनते ही अंग्रेज सार्जेण्ट मेजर हासन ने लेफ्टिनेण्ट एडजूडेण्ट बाग को बुलाने का आदेश दिया। लेफ्टिनेण्ट बाग घोड़े पर सवार होकर घटना स्थल पर पहुंच गया। मंगल पाण्डे ने बाग पर गोली चला दी। पाण्डे की इस गोली से बाग तो बच गया, किन्तु उसका घोड़ा घायल हो गया। घोड़े के घायल होने से लेफ्टिनेण्ट बाग जमीन पर गिर गया, किन्तु पलभर में ही एड्जूडेण्ट बाग तलवार निकाल कर खड़ा हो गया। इसी समय बाग की सहायता के लिए सार्जेण्ट घुसन भी वहाँ पहुँच गया। मंगल पाण्डे ने भी अपनी तलवार निकाल ली। दोनों में घमासान तलवार युद्ध होने लगा। अन्त में मंगल पाण्डे की तलवार से लेफ्टिनेण्ट एडजूडेण्ट बाग धराशाही हो गया। उन्होंने अनुभव किया कि अंग्रेजों से बचना मुश्किल है, तब उन्होंने अंग्रेजों का कैदी बनने के बजाय स्वयं को गोली मारना बेहतर समझा और अपनी छाती पर गोली चला दी, लेकिन वे बच गए और उन्हें घायलावस्था में गिरफ्तार किया गया। मंगल पाण्डे पर सैनिक अदालत में मुकदमा चला। अन्ततः 8 अप्रैल, 1857 को अंग्रेजों ने पूरी रेजीमेण्ट के सामने मंगल पाण्डे को फाँसी दे दी।
मंगल पाण्डे को फाँसी कब दी गई?

A

8 अप्रैल, 1957 को

B

18 अप्रैल, 1857 को

C

8 अप्रैल, 1857 को

D

18 अप्रैल, 1957 को

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
C
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