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Class 6
HINDI
बाबा भारती और खड्गसिंह अस्तबल में पहुँचे...

बाबा भारती और खड्गसिंह अस्तबल में पहुँचे। बाबा ने अपने घोड़े (सुल्तान) को दिखाया घमण्ड से, खड्गसिंह ने घोड़ा देखा आश्चर्य से। उसने सहस्रों घोड़ें देखे थे, परन्तु ऐसा बाँका घोड़ा उसकी आँखों से कभी न गुजरा था। सोचने लगा, भाग्य की बात है। ऐसा घोड़ा खड्गसिंह के पास होना चाहिए था। इस साधु को ऐसी चीजों से क्या लाभ? कुछ देर तक आश्चर्य से चुपचाप खड़ा रहा। इसके पश्चात् उसके हृदय में हलचल होने लगी। बालकों की सी अधीरता से बोला, 'परन्तु बाबाजी, इसकी चाल न देखी तो क्या?'. बाबा जी मनुष्य ही थे। अपनी वस्तु की प्रशंसा दूसरे के मुख से सुनने के लिए उनका हृदय अधीर हो गया। घोड़े को खोलकर बाहर गए। घोड़ा वायुवेग से उड़ने लगा। उसकी चाल देखकर खड़गसिंह के हृदय पर साँप लोट गया। वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसन्द आ जाए उस पर वह अपना अधिकार समझता था। उसके पास बाहुबल था और आदमी थे। जाते-जाते उसने कहा, 'बाबाजी मैं यह घोड़ा आपके पास न रहने दूंगा'।
'कलेजे पर साँप लोटने' का अर्थ है

A

सीने पर साँप को लिटाना

B

शान्तचित्त रहना

C

क्रोधित होना

D

ईर्ष्या से कुढ़ना

लिखित उत्तर

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The correct Answer is:
D

कलेजे पर साँप लोटने. का अर्थ ईर्ष्या से कुढ़ना है।
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