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रात का समय था। सारा श्मशान सन्नाटे में ड...

रात का समय था। सारा श्मशान सन्नाटे में डूबा था। एक दो शव जल रहे थे। इसी समय पुत्र का शव लिए रानी भी श्मशान पर पहुंची। हरिश्चन्द्र ने तारामती से श्मशान का कर माँगा। उनके अनुनय-विनय करने पर तथा उनकी बातों से वे रानी तथा अपने पुत्र को पहचान गए, किन्तु उन्होंने नियमों में ढील नहीं दी उन्होंने अपने मालिक की आज्ञा के विरुद्ध कुछ भी नहीं किया। उन्होंने तारामती से कहा “श्मशान का कर तो तुम्हें देना ही होगा। उससे कोई मुक्त नहीं हो सकता। यदि मैं किसी को छोड़ दूं तो यह अपने मालिक के प्रति विश्वासघात होगा। हरिश्चन्द्र ने तारामती से कहा", यदि तुम्हारे पास और कुछ नहीं है, तो अपनी साड़ी का आधा भाग फाड़ कर दे दो, मैं उसे ही कर में ले लूँगा।"
तारामती विवश थी। उसने जैसे ही साड़ी को फाड़ना आरम्भ.किया, आकाश में गम्भीर गर्जना हुई। विश्वामित्र प्रकट हो गए। उन्होंने रोहिताश्व को भी जीवित कर दिया। विश्वामित्र ने हरिश्चन्द्र को आशीर्वाद देते हुए कहा, "तुम्हारी परीक्षा हो रही थी कि तुम किस सीमा तक सत्य एवं धर्म का पालन कर सकते हो।" यह कहते हुए विश्वामित्र ने उन्हें उनका पूरा राज्य जैसे का तैसा लौटा दिया।
राजा हरिश्चन्द्र ने तारामती से श्मशान में कर के रूप में

A

रुपये लिए

B

कुछ नहीं लिया

C

साड़ी का टुकड़ा लिया

D

साड़ी का टुकड़ा लेने से मना कर दिया

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
C
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