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चाँदबीबी ने मुगल दरबार के अमीरों तथा सरद...

चाँदबीबी ने मुगल दरबार के अमीरों तथा सरदारों से आपसी मतभेद भुलाकर अहमदनगर की रक्षा करने का वचन लिया। यह चाँदबीबी की प्रथम सफलता थी।
दरबार में अमीरों को संगठित करने के बाद उन्होंने बीजापुर राज्य से सन्धि की और इब्राहिम शाह के पुत्र को गद्दी पर बैठाकर शासन का कार्य सम्भाल लिया।
अहमदनगर का मोर्चा सुदृढ़ करने के लिए चाँदबीबी स्वयं बुरका पहनकर घोड़े पर सवार होकर युद्ध की तैयारी देखती थीं। वे मोर्चों पर जाकर सैनिकों का उत्साह बढ़ाती थीं,
उनका आह्वान करतीं कि यह राज्य के मान-अपमान का प्रश्न है, आओ! मेरे साथ आओ और बहादुरी से युद्ध करो। चाँदबीबी के साहस, धैर्य और शौर्य को देखकर सैनिकों का उत्साह बढ़ जाता था।
युद्ध कई दिनों तक चला। विशाल मुगल सेना अहमदनगर के छोटे से राज्य को दबा न सकी। एक दिन मुगल सेना ने सुरंग लगाकर किले की एक दीवार को उड़ा दिया।
अहमदनगर के सैनिक घबरा गए, क्योंकि अब मुगल सेना को रास्ता मिल गया था। मुगल सेना भी खुश थी कि अब तो विजय निश्चित ही है,
किन्तु चाँदबीबी रात भर दीवार पर खड़े होकर सैनिकों और कारीगरों का उत्साह बढ़ाती रही। रातों-रात किले की दीवार की मरम्मत कर दी गई। मुगल सेना यह देखकर आश्चर्यचकित रह गई।
चाँदबीबी किसके विरुद्ध लडी?

A

अंग्रेजों के

B

गुलाम वंश के शासकों के

C

मुगल सेना के

D

इनमें से कोई नहीं

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
C
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