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शेरशाह सूरी समय का सदुपयोग करता था। सुबह...

शेरशाह सूरी समय का सदुपयोग करता था। सुबह से देर रात तक वह राज्य के कार्यों में व्यस्त रहता था। कठोर परिश्रम करता था, प्रजा की दशा जानने के लिए देश-भ्रमण करता था। जनता की सुख-सुविधाएँ बढ़ाने के लिए उसने शासन व्यवस्था को सुसंगठित किया। रुपये के सिक्के सर्वप्रथम शेरशाह ने ही ढलवाए। उसने खोटे और मिली-जुली धातु के सिक्कों का चलन बन्द कर दिया। सोने, चाँदी और ताँबे के सिक्के ढलवाए गए। ये बढ़िया और मानक सिक्के थे। उसके समय बाँट और माप की प्रणाली में सुधार हुआ। भवन-निर्माण में भी शेरशाह की गहरी रुचि थी। उसने दिल्ली के निकट यमुना के तट पर एक नया नगर भी बसाया। वह विद्वानों को संरक्षण देता था। जायसी के 'पद्मावत' जैसे श्रेष्ठ महाकाव्य की रचना उसी के समय में हुई।
‘जायसी' किसके समकालीन था?

A

अलाउद्दीन खिलजी

B

इब्राहीम लोदी

C

बहलोल लोदी

D

शेरशाह सूरी

लिखित उत्तर

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The correct Answer is:
D
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