Home
Class 14
HINDI
"है अमा-निशा, उगलता गगन घन-अन्धकार, ख...

"है अमा-निशा, उगलता गगन घन-अन्धकार,
खो रहा दिशा का ज्ञान, स्तब्ध है पवन-चार,
अप्रतिहत गरज रहा पीछे अम्बुधि विशाल,
भूधर ज्यों ध्यान-मग्न केवल जलती मशाल।
स्थिर राघवेन्द्र को हिला रहा फिर-फिर संशय
रह-रह उठता जग-जीवन में रावण-जय-भय,
जो नहीं हुआ आज तक हृदय रिपु-दम्य-श्रान्त,
एक भी, अयुत-लक्ष में रहा जो दुराक्रान्त,
कल लड़ने को हो रहा विकल वह बार-बार,
असमर्थ मानता मन उद्यत हो हार-हार।"
'अम्बुधि' का समानार्थी शब्द है -

A

बादल

B

सागर

C

समीर

D

कमल

लिखित उत्तर

Verified by Experts

Promotional Banner