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BIOLOGY
बीजों के प्रकीर्णन की विभिन्न विधियों का...

बीजों के प्रकीर्णन की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए।

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वायु द्वारा प्रकीर्णन (Dispersal by Wind)- वायु में प्लवन करने (उड़ने) व प्लवनशीलता (buoyancy) बढ़ाने के लिए आवश्यकतानुसार फल व बीज में निम्नवत् विशेषताएँ पायी जाती हैं
1. सपक्ष फल एवं बीज (Winged Fruits and Seeds)-फल या बीज को हल्का करने के लिए उनकी भित्तियाँ या पुष्प के अंग फैलकर चपटे पंख सदृश संरचना बना लेते हैं जिससे कि बीज या फल वायु में आसानी से प्लवन द्वारा दूर-दूर पहुँच सकें, जैसे-
(i) समारा (Samara) फलों में फलभित्ति के फैल जाने से पंख जैसी संरचना बन जाती है। ऐसे फल प्रायः एकबीजी होते हैं। चिलबिल (Indian elm), माधवीलता (Hiptage), मैपल (Maple) आदि इसी प्रकार के फल हैं।
(ii) सिरस, शीशम आदि के लेग्यूम (legume) फल चपटे, पतले तथा अत्यन्त हल्के होने के कारण वायु में आसानी से प्लवन कर सकते हैं।
(iii) साल (Shorea sp.) में बाह्यदलपुंज चिरलग्न (persistent) पंख सदृश संरचना बना लेते हैं।
2. पैराशूट प्रक्रिया (Parachute mechanism)-कुछ फल और बीजों के उपांग (appendages) पैराशूट की तरह कार्य करते हैं जिससे बीज या फल अधिक समय तक वायु में रह सकें और अधिक दूर तक वितरित हो सकें, जैसे—
(i) रोमगुच्छ या पैपस (Pappus)-कम्पोजिटी (compositae) कुल के फलों में चिरलग्न रोमिल बाह्यदल (pappus) होते हैं, जैसे-टैरेक्सेकम (Taraxacum), सूर्यमुखी (Sunflower), डेण्डेलियॉन (Dandelion) आदि।
(ii) कुछ पौधों के फलों में चिरलग्न रोमल वर्तिकाएँ (hairy styles) पायी जाती हैं, जो वायु में पैराशूट की तरह काम करती हैं, जैसे-क्लीमेटिस (Clematis), नारवेलिया (Narvelia) आदि।
(iii) रोमल अतिवृद्धि, कुछ पादपों के बीजों के बीजावरण पर रोमल अतिवृद्धि पायी जाती है। इससे बीज अत्यन्त हल्का हो जाता है, जैसे--कपास (cotton)।
जन्तु द्वारा प्रकीर्णन (Dispersal by Animals) -इस प्रकार के फल तथा बीज में चिपकने वाले पदार्थ, अंकुश तथा शूल आदि मिलते हैं, जैसे-ओखरा (Xanthium) में अंकुश (hook) मिलते हैं। बाघनखी (Martynia) में दो मुड़े हुए अंकुश होते हैं। गोखरू (Tribulus) में तेज कठोर काँटे होते हैं आदि। सरस गूदेदार फलों को आकर्षक रंग व गन्ध के कारण विभिन्न प्रकार के पक्षियों तथा जन्तुओं द्वारा खाया जाता है। रत्ती (Abrus) के बीज सुन्दरता के कारण चिड़ियों द्वारा खाने के लिए चोंच में रख लिए जाते हैं, परन्तु कठोर बीज-चोल के कारण कहीं दूसरे स्थान पर छोड़ दिए जाते हैं। अधिकांश बीज कठोर बीजचोल के कारण पक्षियों तथा जन्तुओं द्वारा मल के साथ त्याग दिए जाते हैं, जो अनुकूल परिस्थितियों में अंकुरित हो जाते हैं।
जल द्वारा प्रकीर्णन (Dispersal by Water) - जल द्वारा प्रकीर्णन केवल पानी में अथवा जल के पास रहने वाले पौधों में मिलता है। इस प्रकार के फलों तथा बीजों में प्लवनशीलता (buoyancy) मिलती है। जल द्वारा प्रकीर्णन नारियल, सिंघाड़ा, कमल आदि में होता है। नारियल का रेशेदार मीसोकार्प (fibrous mesocarp) पानी में बहने में सहायक होता है।

सिंघाड़ा का फल बेल से टूटकर पानी में जम जाता है।
कमल में एरिल (aril) प्लवनशील होता है जिससे बीज को पानी में तैरना आसान होता है। कमल का स्पंजी पुष्पासन भी प्रकीर्णन में सहायक होता है।
फल तथा बीजों के प्रकीर्णन का महत्त्व (Significans or Dispersal or Fruits and seeds)- पुष्पीय पौधे अधिकाधिक बीज पैदा करते हैं, जिससे उनकी प्रजाति सृष्टि में बनी रहे। बीज तथा फलों का प्रकीर्णन विभिन्न युक्तियों से होता है। प्रकीर्णन निम्नलिखित कारणों से पौधों के हित में है-
(1) प्रकीर्णन के फलस्वरूप प्रजातियाँ दूर-दूर तक फैल जाती हैं, जिससे इनके नष्ट होने की सम्भावना नहीं रहती। प्रजातियों को उपयुक्त आवास उपलब्ध हो जाता है।
(2) अंकुरण के फलस्वरूप उत्पन्न नवोद्भिद् पादपों को जीवित रहने के लिए उचित मात्रा में जल, खनिज लवण तथा प्रकाश की आवश्यकता होती है। प्रकीर्णन के फलस्वरूप इनमें जीवन-संघर्ष की सम्भावना कम हो जाती है।
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