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BIOLOGY
टायलोसिस पर टिप्पणी लिखिए।...

टायलोसिस पर टिप्पणी लिखिए।

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हीमोडाइलेसिस
(Haemodialysis)
वृक्कों के निष्क्रिय होने से रक्त में यूरिया की मात्रा बढ़ने लगती है। इसे यूरीमिया (uremia) कहते हैं। यह हानिकारक है। इसके रोगियों में यूरिया का कृत्रिम निष्कासन हीमोडाइलेसिस (रक्त अपोहन) द्वारा होता है। रोगी की धमनी से रक्त निकालकर

`0^(@)C` तक ठण्डा किया जाता है। उसमें हिपैरिन जैसा कोई थक्कारोधी (anticoagulant) मिलाकर अपोहनकारी इकाई (कृत्रिम वृक्क) में भेजा जाता है। इसमें एक सेलोफेन (cellophane) झिल्ली से बनी कुण्डलित नलिका होती है और यह ऐसे द्रव से घिरी रहती है जिसका संगठन नाइट्रोजनी अपशिष्टों को छोड़कर प्लाज्मा के समान होता है। छिद्रयुक्त सेलोफेन झिल्ली से अपोहनी द्रव में अणुओं का आवागमन सान्द्रण प्रवणता के अनुसार होता है। अपोहनी द्रव में नाइट्रोजनी अपशिष्ट अनुपस्थित होते हैं। अत: ये पदार्थ बाहर की ओर निकल जाते हैं और रक्त शुद्ध हो जाता है। शुद्ध रक्त में हिपैरिन विरोधी डालकर रक्त को सामान्य ताप पर लाकर उसे रोगी की शिराओं द्वारा पुन: शरीर में भेज दिया जाता है। इस प्रक्रिया को हीमोडाइलेसिस (haemodialysis) कहते हैं। इसके द्वारा यूरीमिया व्याधि से रोगियों का उपचार किया जाता है।
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