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BIOLOGY
स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र का वर्णन कीजिए...

स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र का वर्णन कीजिए |

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स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र (Autonomic Nervous System) यह तन्त्र स्वतन्त्र रूप से कार्य करता है, किन्तु अन्तिम रूप से इसका नियन्त्रण केन्द्रीय तन्त्रिका तन्त्र द्वारा ही होता है।
स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र या आंतरांगीय तन्त्रिका तन्त्र (visceral nervous system) का निर्माण केन्द्रीय तन्त्रिका तन्त्र से सम्बन्धित तन्त्रिकाओं द्वारा होता है, जो स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र के गुच्छकों (ganglia) में प्रवेश कर जाते हैं। इन तन्त्रिका तन्तुओं को पूर्वगुच्छीय तन्तु (preganglionic fibres) कहते हैं। स्वायत्त गुच्छंकों (autonomic ganglia) से निकलने वाले तन्त्रिका तन्तुओं को पश्चगुच्छीय तन्तु (postganglionic fibres) कहते हैं। ये तन्तु शरीर के विभिन्न अंगों में प्रवेश करते हैं। स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र आंतरांगों की क्रिया का नियमनं करता है।
संरचना तथा कार्यिकी के आधार पर स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र के निम्नलिखित दो घटक होते हैं -
परानुकम्पी तन्त्रिका तन्त्र (Parasympathetic Nervous System)
परानुकम्पी तन्त्रिका तन्त्र के गुच्छक आंतरांगों के भीतर या उनके एकदम पास स्थित होते हैं। इसमें पूर्वगुच्छीय तन्तु बहुत लम्बे होते हैं तथा पश्चगुच्छीय तन्तु छोटे होते हैं। तन्त्रिका गुच्छक आपस में सम्बन्धित नहीं रहते हैं। इस तन्त्रिका तन्त्र के तन्तु केन्द्रीय तन्त्रिका तन्त्र के मस्तिष्क की कपाल तन्त्रिकाओं (III, VII, IX व XI) तथा मेरुरज्जु के त्रिक प्रदेश (sacral region) से निकलते हैं। अतः परानुकम्पी तन्त्रिका तन्त्र को कपालीय त्रिक प्रवाह (cranio saeral outflow) भी कहते हैं।

॥. अनुकम्पी तन्त्रिका तन्त्र (Sympathetic Nervous System)
अनुकम्पी तन्त्रिका तन्त्र एक भली-भाँति एकीकृत (well integrated) तंन्त्र के रूप में होता है। इसके तन्त्रिका गुच्छक मेरुरज्जु के दोनों पार्यों में स्थित होते हैं तथा आपस में तन्त्रिकाओं द्वारा जुड़े रहते हैं। अनुकम्पी तन्त्रिका तन्त्र के तन्त्रिका तन्तु मेरुरज्जु के वक्ष (thoracic) तथा कटि प्रदेश (lumbar region) से बाहर निकलते हैं। अत: इसे वक्षीय कटि प्रवाह (thoraco lumbar outflow) कहते हैं।
अनुकम्पी तन्त्रिका तन्त्र के पूर्वगुच्छीय तन्तु छोटे होते हैं तथा पश्चगुच्छीय तन्तु लम्बे होते हैं। कभी-कभी अंग विशेष से पहले भी अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र के गच्चक उपस्थित होते हैं, इन्हें कोलैटरल गच्चक कहते हैं।
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