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Class 12
CHEMISTRY
द्वितीयक अथवा तृतीयक ऐल्कोहॉलों के अम्ली...

द्वितीयक अथवा तृतीयक ऐल्कोहॉलों के अम्लीय निर्जलन द्वारा ईथरों को बनाने की विधि उपयुक्त नहीं है। कारण बताइए।

लिखित उत्तर

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प्राथमिक ऐल्कोहॉल के अम्लीय निर्जलन द्वारा ईथर बनाने की अभिक्रिया `SN_2` क्रियाविधि द्वारा सम्पन्न होती है जिसमें प्रोटॉनित ऐल्कोहॉल अणु पर ऐल्कोहॉल अणु की नाभिकरागी अभिक्रिया होती है।

यद्यपि इन परिस्थितियों के अन्तर्गत द्वितीयक तथा तृतीयक ऐल्कोहॉल ईथरों के स्थान पर ऐल्कीन देते हैं। इसका कारण यह है कि त्रिविमीय बाधा के कारण प्रोटॉनित ऐल्कोहॉल अण पर ऐल्कोहॉल अंण की नाभिकरागी अभिक्रिया द्वितीयक तथा तृतीयक ऐल्कोहॉल एक जल का अणु निकालकर स्थायी द्वितीयक तथा तृतीयक काबोंकैटायन बनाते हैं। ये काबोंकैटायन एक प्रोटॉन निकालकर ऐल्कीन बनाने को वरीयता देते हैं न कि ऐल्कोहॉल अणु की अभिक्रिया द्वारा ईथर बनाने को।
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