लकड़ी के भंजक आसवन से (By destructive distillation of wood)चित्र में दिखाई गई विधि के अनुसार वायु की अनुपस्थिति में शुष्क लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़ों को गाड़ी (carriage) में भरकर 673-723K तक लोहे की रिटॉर्ट में भट्ठी में रखकर गर्म किया जाता है। गर्म करने पर भंजन से जो वाष्प निकलती है उन वाष्पों को संघनित करके एक गाढ़ा लाल-भूरा द्रव प्राप्त कर लिया जाता है, जिसे पाइरोलिग्नियस अम्ल कहते हैं। कुछ गैस संघनित नहीं होती, इसे काष्ठ गैस (wood gas) कहते हैं।
इस प्रकार हरी लकड़ी के भंजक आसवन से निम्न पदार्थ मिलते हैं- (i) काष्ठ गैस (Wood gas)-यह कई गैसों का मिश्रण होती काष्ठ गैस है। इनमें `CO, CH_4,CO_2,O_2`, तथा`N_2` प्रमुख हैं। इसे भट्ठी में ईंधन के रूप में प्रयुक्त कर सकते हैं। (ii) पाइरोलिग्नियस अम्ल (Pyroligneous acid)-यह तीन यौगिकों का लाल-भूरे रंग का जलीय विलयन है जिसमें मेथेनॉल , लगभग 2-4%, ऐसीटिक अम्ल 8-10% तथा ऐसीटोन 0.2-0.5% मात्रा में होते हैं और शेष जल होता है। यह मिश्रण अम्लीय प्रकृति का होता है। (iii) काष्ठ-टार (Wood-tar)—यह पाइरोलिग्नियस अम्ल से भारी होने के कारण, काले रंग की परत के रूप में नीचे बैठ जाता है। यह भी कोल-टार के समान काले रंग का गाढ़ा द्रव है जो लकड़ी को सुरक्षित रखने तथा सड़क पर बिछाने में प्रयुक्त किया जाता है। इसमें ऐरोमैटिक यौगिक का मिश्रण होता है। (iv) काष्ठ-कोयला (Wood charcoal)-यह लकड़ी का कोयला है जो, भंजक आसवन करने वाले पात्र (रिटॉर्ट) में .शेष बचा रहता है।