स्टार्च के किण्वन द्वारा एथेनॉल का निर्माण (Manufacture of ethanol by fermentation of starch) गेहूँ, जौं, मक्का, चावल, आलू आदि में स्टार्च की काफी मात्रा होती है, इन्हीं से स्टार्च का जल में विलयन तैयार किया जाता है।
स्टार्च से एथिल ऐल्कोहॉल (एथेनॉल) का निर्माण निम्न पदों में किया जाता है -(i) शर्करीकरण (Saccharification)-स्टार्च का माल्टोस (माल्ट शर्करा) में बदलना, शर्करीकरण कहलाता है, यह अभिक्रिया निम्न पदों में पूर्ण होती है -
(a) मैश बनना (Preparation of mash)-आलू जैसे स्टार्च युक्त पदार्थों के छोटे-छोटे टुकड़े करके अच्छी तरह पीसकर अति तप्त भाप (super heated steam) द्वारा उच्च दाब पर गर्म करते हैं जिससे स्टार्च, कोशिकाओं से बाहर आकर जल के साथ मिलकर एक सफेद लेई बना लेता है जिसे मैश कहते हैं। (b) माल्ट निष्कर्ष बनना (Preparation of malt extract)-जौं में डायस्टेस (diastase) नामक एन्जाइम होता है। जौं के दानों को भिगोकर एक अँधेरे कमरे में 288K ताप पर रख देते हैं। दो-तीन दिन में जौं के दाने अंकुरित हो जाते हैं। अंकुरित दानों में डायस्टेस अधिक मात्रा में होता है। अंकुरण को रोकने के लिए अंकुरित दानों को 333K तक गर्म करते हैं। अंकुरित जौं को पानी के साथ पीसकर छान लिया जाता है। छनित द्रव को माल्ट निष्कर्ष कहते हैं। इस माल्ट निष्कर्ष में डायस्टेस एन्जाइम काफी मात्रा में होता है। (ii) जल-अपघटन (Hydrolysis)-स्टार्च के विलयन मैश में माल्ट निष्कर्ष मिलाकर मिश्रण को 323-333K ताप पर रखा जाता है। माल्ट निष्कर्ष में उपस्थित डायस्टेस एन्जाइम द्वारा स्टार्च का जल-अपघटन होता है और माल्टोस नामक शर्करा बनती है। माल्टोस के विलयन को वार्ट (wort) कहते हैं।
`(2C_6H_10O_6)_n + nH_2O underset("डायस्टेस ")overset("माल्ट निष्कर्ष से")(to) nC_12H_22O_11`
(iii) किण्वन (Fermentation)-उपर्युक्त क्रिया से प्राप्त माल्टोस विलयन में यीस्ट डालते हैं और विलयन को लगभग 303 K पर रख देते हैं। धीरे-धीरे किण्वन की अभिक्रिया प्रारम्भ होती है जिसमें यीस्ट में उपस्थित माल्टेस एन्जाइम द्वारा माल्टोस का परिवर्तन ग्लूकोस में होता है और फिर यीस्ट में ही उपस्थित जाइमेस एन्जाइम, ग्लूकोस को एथेनॉल में परिवर्तित कर देता है।
किण्वन के पश्चात् प्राप्त द्रव को भी वाश (wash) कहते हैं, जिसमें 10-15% एथेनॉल होता है। (iv) आसवन (Distillation) उपर्युक्त क्रिया से प्राप्त वाश का भी कॉफी भभके से प्रथम विधि में वर्णित विधि द्वारा आसवन करके परिशोधित स्पिरिट (95.5% शुद्ध एथेनॉल) प्राप्त किया जाता है। एथिल ऐल्कोहॉल के उपयोग- (i) स्पिरिट बनाने में, (ii) विलायक के रूप में, , (iii) पेय पदार्थ के निर्माण में (iv) ईंधन के रूप में, (v) गैसोहॉल (`C_2H_5OH` + गैसोलीन) के निर्माण में।