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CHEMISTRY
फीनॉल की अम्लता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिख...

फीनॉल की अम्लता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

लिखित उत्तर

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सन् 1934 ई० में रंगे (Runge) ने कोलतार के प्रभाजी आसवन से प्राप्त मध्यम तेल प्रभाज से फोनॉल को प्राप्त किया था जिसे कार्बोलिक अम्ल कहा गया क्योंकि (Carbo= Coal, oleum = Oil) होता है। जब फोनॉल 5% जल रखता है जो साधारण ताप पर द्रव है, तो इस द्रव को ही कार्बोलिक अम्ल कहते हैं। फीनॉल-का-अम्लीय गुण उसके फोनॉक्साइड आयन के स्थायित्व के कारण होता है, जो अनुनाद के कारण है। फीनॉल में - OH समूह बेन्जीन नाभिक से जुड़ा होता है अतः प्रोटॉन त्यागने पर यह फीनॉक्साइड आयनं बनाता है जो अनुनाद के कारण स्थायित्व व्यक्त करता है अत: फीनॉल का अम्लीय गुण उसके फोनॉक्साइड के अनुनादी स्थायित्व के कारण होता है। फोनॉक्साइड आयन के इलेक्ट्रॉनों के विस्थानीकरण से प्राप्त अनुनादी संरचनाओं में ऑक्सीजन परमाणु पर कोई धनावेश नहीं होता है, अर्थात् इनमें केवल ऋणावेश का विस्थानीकरण होता है। अत: फोनॉक्साइड आयन अनआयनित फीनॉल की तुलना में अधिक स्थायी हो जाता है, फलस्वरूप प्रोटॉन देकर अम्लीय गुण व्यक्त करता है।

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