खमीर या यीस्ट एक प्रकार का पौधा या फफूंदी है जो एककोशिकीय सूक्ष्म जीव भी है। यह जीव अपने भोजन की आपूर्ति के लिए शर्करायुक्त पदार्थों के अपघटन से ऊर्जा प्राप्त करता है। यीस्ट को किण्व (ferment) भी कहते हैं। यीस्ट (किण्व) द्वारा शर्कराओं के अपघटन की क्रिया को किण्वन कहते हैं। यीस्ट में उपस्थित एन्जाइम, जो संकीर्ण नाइट्रोजनयुक्त पदार्थ होते हैं, किण्वन क्रिया को संचालित करते हैं। अत: किण्वन एक ऐसी रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें कार्बनिक पदार्थों का, अणुजीवों (किण्वों) या उनमें उपस्थित एन्जाइमों द्वारा मन्द गति से अपघटन होता है।
अणुजीवों में विद्यमान नाइट्रोजनयुक्त पदार्थों को एन्जाइम कहते हैं जो मूल रूप से कार्बनिक यौगिकों के अपघटन के उत्तरदायी होते हैं। दूध से दही बनना, पदार्थों का सड़ना तथा गन्ने के रस से सिरका बनना किण्वन के उदाहरण हैं। किण्वन क्रिया में `CO_2, CH_4` आदि गैसें निकलती हैं और ऊर्जा मुक्त होती हैं।
किण्वन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ निम्नलिखित हैं-
(1) ताप - `25-35^@C` ताप ऐल्कोहॉलिक किण्वन के लिए अत्यन्त उपयोगी है। (2) वायु की उपस्थिति-वायु की उपस्थिति किण्वन के लिए अनुकूल है। (3) सान्द्रता-किण्वन के लिए विलयन का तनु (8-10%) होना आवश्यक है। (4) पोषक पदार्थों की उपस्थिति—किण्वन के लिए कुछ पोषक पदार्थ जैसे `(NH_4)_2SO_4` , अमोनियम फॉस्फेट आदि नाइट्रोजनी पदार्थों का होना आवश्यक है क्योंकि ये ऊर्जा के अभाव में किण्वों को ऊर्जा प्रदान करते हैं।