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CHEMISTRY
हमें कृत्रिम मधुरकों की आवश्यकता क्यों प...

हमें कृत्रिम मधुरकों की आवश्यकता क्यों पड़ती है?

लिखित उत्तर

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प्राकृत मधुरक, जैसे-सुक्रोस, ग्रहण की गई कैलोरी बढ़ाते हैं इसलिए बहुत से लोग कृत्रिम मधुरक प्रयोग करना अधिक पसन्द करते हैं। ऑथों-सल्फोबेन्जीमाइड, जिसे सैकरीन भी कहते हैं, प्रथम लोकप्रिय कृत्रिम मधुरक है। यह सन् 1879 से खोज के समय से ही मधुरक की तरह प्रयोग में लाया जाता रहा है। यह सुक्रोस (cane sugar) से लगभग 550 गुना अधिक मीठी होती है। यह शरीर से अपरिवर्तित रूप में ही मूत्र के साथ उत्सर्जित हो जाती है। यह सेवन के पश्चात् पूर्णतः अक्रिय और सुरक्षित प्रतीत होती है। इसका प्रयोग मधुमेह के रोगियों एवं उन व्यक्तियों के लिए जिन्हें कैलोरी अन्तर्ग्रहण पर नियन्त्रण की आवश्यकता है, अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है।
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