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ईश्वर का नाम लेकर उस पर विश्वास कर हम मन...

ईश्वर का नाम लेकर उस पर विश्वास कर हम मन में शक्ति का एकीकरण कर कार्यरत होते हैं । हमारा विश्वास मजबूत होता है कि हमारे साथ ईश्वर है । हम इस कार्य में सफल होंगे । आत्मविश्वास को दृढ़ बनाने के लिए ईश्वर का अस्तित्व बनाया गया है । इसके साथ-साथ 'ईश्वर' की कल्पना मनुष्य को भयभीत भी करती है । एकांत में भी मनुष्य कोई पाप या गलत काम न कर सके, इसी आधार पर उसे सर्वव्यापी, सर्वद्रष्टा बतलाया गया है। कण-कण में उसका निवास माना गया है । मनुष्य पर नियंत्रण रखने के लिए किसी न किसी शक्ति की आवश्यकता तो है ही । इसी आधार पर ईश्वर की संकल्पना की गई और इसी प्रकार असफलताओं को रोकने के लिए, अपने दोष पर परदा डालने के लिए 'भाग्य' की भी कल्पना की गई। हम स्वयं अपने भाग्य विधाता है । जैसा कार्य करेंगे, वैसा फल पाएंगे। अतएव भाग्य को आप दोष न देंचींटी को देखें । वह कितनी बार चढ़ती-गिरती है । अगर वह भाग्यवादी होती तो फिर चढ़ ही न पाती । निरंतर प्रयास करके ही वह सफल होती है । वह भाग्य पर निर्भर नहीं, कर्म करके दिखलाती है। इस कारण बराबर कार्य में लगे रहें । सफलता हाथ आए या फिर असफलता ..., सफलता पर प्रसन्न होकर अपनी प्रगति धीमी न करें । असफलता पर घबराकर या निराश होकर मैदान छोड़कर न भागे । अपना कार्य बराबर आगे बढ़ाते रहें । जो उद्यम करते हैं, परिश्रमरत रहते हैं, निरंतर अपने कदम का प्यान रखते हैं, वे अवश्य ही जो भी इच्छा करते हैं, पा जाया करते हैं।
गद्यांश में समर्थन किया गया है

A

धर्मवाद का

B

ईश्वरवाद का

C

भाग्यवाद का

D

कर्मवाद का

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  1. ईश्वर का नाम लेकर उस पर विश्वास कर हम मन में शक्ति का एकीकरण कर कार्यर...

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  2. जब में था तब हरि नहीं, अब हरि है में नॉहि। सब अंधियारा मिटि गया, जब ...

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  5. निम्नलिखित कथनों में से सत्य कथन छाँटिए

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  6. बीमारों घर पहुंचकर भीतर ही भीतर कुछ बेचैनी महसूस करने लगी। उसके भीतर त...

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  7. बीमारों घर पहुंचकर भीतर ही भीतर कुछ बेचैनी महसूस करने लगी। उसके भीतर त...

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  8. ततांरा से मुक्त होने की झूठी छटपटाहट का आशय है

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  9. बीमारों की कल्पना वाला ततांरा कैसा था?

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  10. गांव की क्या परंपरा थी?

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  11. निम्नलिखित पठित पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चु...

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  13. निम्नलिखित पठित पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चु...

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