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Class 12
CHEMISTRY
तात्क्षणिक वेग और औसत वेग में अन्तर स्पष...

तात्क्षणिक वेग और औसत वेग में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

लिखित उत्तर

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तात्क्षणिक वेग प्राप्त करने के लिए औसत वेग के समय अन्तराल `(Deltat)` को घटाकरशून्य की ओर ले जाते है और सान्द्रता का सीमान्त मान ज्ञात करते है। यदि अभिक्रिया के अभिकारक और उत्पाद की सान्द्रता परिवर्तन को `DeltaC` और परिवर्तन में लगने वाले समय को `Deltat` माना जाए तो
अभिक्रिया का औसत वेग = `pm(DeltaC)/(Deltat)`
अवकलन की भाषा में,
अभिक्रिया का तात्क्षणिक वेग = `underset(Deltatrarr0)(Lim)pm(DeltaC)/(Deltat)`
या अभिक्रिया का तात्क्षणिक वेग = `pm(dC/(dt)`
यहाँ dt अनन्त सूक्ष्म अन्तराल और इस समय अन्तराल में हुआ अनन्त सूक्ष्म सान्द्रता परिवर्तन dC है। अभिक्रिया के तात्क्षणिक वेग को `r_("inst")` द्वारा व्यक्त करते है। अतः
`r_("inst")=pm(dC)/(dt)`
अभिक्रिया के तात्क्षणिक वेग को समय और सान्द्रता के मध्य खींचे गए ग्राफ की सहायता से भी ज्ञात करते है। समय व सान्द्रता के मध्य खींचे गए ग्राफ में किसी विशिष्ट समय और विशिष्ट सान्द्रता के संगत बिन्दु पर खींची गई स्पर्श रेखा का ढाल अभिक्रिया के तात्क्षणिक वेग को प्रदर्शित करता है।
औसत वेग
किसी रासायनिक अभिक्रिया में एक निश्चित समय में अभिकारक (या उत्पाद) की मोलर सान्द्रता में हुए परिवर्तन को समय से भाग देकर उस अभिक्रिया का औसत वेग ज्ञात किया जाता है अर्थात किसी रासायनिक अभिक्रिया में उपस्थित अभिकारक या उत्पाद की सान्द्रता में प्रति इकाई समय में होने वाले परिवर्तन को उस अभिक्रिया का औसत वेग कहते है।
औसत वेग `=-("अभिकारक की सान्द्रता में परिवर्तन")/("परिवर्तन में लगा समय")`
औसत वेग = `+("उत्पाद की सान्द्रता में परिवर्तन")/("परिवर्तन में लगा समय")`
यहाँ (-) चिन्ह समय के साथ अभिकारक की सान्द्रता में कमी को और (+) चिन्ह समय के साथ उत्पाद की सान्द्रता में वृद्धि को प्रदर्शित करता है।
माना कि कोई एक रासायनिक अभिक्रिया निम्न प्रकार से होती है-
`RrarrP`
यह अभिक्रिया स्थिर आयतन और ताप पर होती है। R अभिकर्मक और P उत्पाद को दर्शाता है। अभिरकिया की रससमीकरणमिति के अनुसार उपर्युक्त समीकरण में एक मोल अभिकारक (R), एक मोल उत्पाद (P) बनता है।
यदि `t_(1)` और `t_(2)` समय पर अभिकारक और उत्पाद की सान्द्रताएँ `[R]_(1)` एवं `[P]_(1)` तथा `[R]_(2)` एवं `[P]_(2)` हो तो
`Deltat=t_(2)-t_(1)`
`Delta[R]=[R]_(2)-[R]_(1)`
`Delta[P]=[P]_(2)-[P]_(1)`
अतः अभिकारक के सापेक्ष अभिक्रिया का औसत वेग = `-(Delta[R])/(Deltat)`
तथा उत्पाद के सापेक्ष अभिक्रिया का औसत वेग = `+(Delta[P])/(Deltat)`
उपर्युक्त अभिक्रिया में R की सान्द्रता में कमी और P की सान्द्रता में वृद्धि हो रही है अर्थात R धीरे-धीरे विलुप्त होता है तथा .P. बनता जाता है। इस आधार पर औसत वेग को निम्न प्रकार से भी व्यक्त कर सकते है-
अतः R के विलुप्त होने का औसत वेग `=-(Delta[R])/(Deltat)`
तथा P के बनने का औसत वेग `=+(Delta[P])/(Deltat)`
औसत अभिक्रिया वेग को `r_(aw)` लिखते है। अभिक्रिया की रससमीकरणमिति के अनुसार जितने समय में अभिकारक (R) का एक मोल विलुप्त होता है, उतने ही समय में उत्पाद (P) का एक मोल बन जाता है, अर्थात अभिकारक के विलुप्त होने का वेग और उत्पाद के बनने का वेग समान होता है।
`-(Delta[R])/(Deltat)=+(Delta[P])/(Deltat)`
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