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CHEMISTRY
अभिक्रिया के वेग पर ताप व सान्द्रण के प्...

अभिक्रिया के वेग पर ताप व सान्द्रण के प्रभाव को समझाइये।

लिखित उत्तर

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अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करने वाले कारक
1. सान्द्रण का प्रभाव- अणुओं के आपस में टकराने से रासायनिक अभिक्रियाएं होती है। गैसों के अणु तीव्र गति से चलते रहते है और आपस में टकराते रहते है। ये अणु टकराने पर ही अभिक्रिया कर सकते है। ये आपसी टककरें जितनी अधिक होगी, परिणामी पदार्थ उतने ही अधिक मात्रा में बनेंगे, परन्तु इकाई आयतन में जितने अधिक अणु होंगे, टक्करें की संख्या में वृद्धि के कारण अभिक्रिया के वेग में वृद्धि होती है।
अभिक्रिया का वेग `prop` उसके अभिकारकों का सान्द्रण
अतः अभिकारकों को सान्द्रण बढ़ने से अभिक्रिया का वेग बढ़ेगा और उनका सान्द्रण घटने से अभिक्रिया का वेग घटेगा।
2. ताप का प्रभाव- किसी अभिक्रिया का वेग ताप-वृद्धि के साथ बहुत अधिक बढ़ता है। सामान्यतया ताप में `10^(@)C` की वृद्धि अभिक्रिया के वेग को दोगुना या तीन गुना कर देती है। किसी अभिक्रिया के दो तापो के `10^(@)C` अन्तराल पर वेग स्थिरांक का अनुपात तापीय गुणांक कहलाता है। साधारणतया ये दो ताप `25^(@)C` तथा `35^(@)C` लिए जा सकते है।
अतः तापीय गुणांक `=(k_(35^(@)C))/(k_(25^(@)C))`
जहाँ `k_(35^(@)C)=35^(@)C` ताप पर अभिक्रिया का वेग स्थिरांक तथा `k_(25^(@)C)=25^(@)C` ताप पर अभिक्रिया का वेग स्थिरांक है। बहुत-सी अभिक्रियाओं के लिए ज्ञात किया जा चूका है कि `10^(@)C` ताप-वृद्धि पर तापीय गुणांक दो गुना या तीन गुना हो जाता है, जैसे-HI के वियोजन का तापीय गुणांक 1.8 होता है। गणना के द्वारा सिद्ध किया जा सकता है कि `10^(@)C` ताप बढ़ने पर अभिक्रिया करने वाले अणुओं के संघट्टों की संख्या केवल 2 या 3 प्रतिशत बढ़ती है, जबकि अभिक्रिया का वेग 100 या 200 या अधिक प्रतिशत तक भी बढ़ सकता है।
3. दाब का प्रभाव- अभिकारी अणुओं पर दाब डालने से अणु परस्पर निकट आ जाते है क्योकि उनका आयतन घट जाता है। अतः इकाई आयतन में उनका सान्द्रण बढ़ जाता है जिससे अणुओं की संख्या में वृद्धि हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप अणुओं की प्रभावी टक्करों की संख्या भी बढ़ जाती है और अभिक्रिया तेजी से होने लगती है। अतः अभिक्रिया के वेग पर दाब और सान्द्रण बढ़ाने का समान प्रभाव पड़ता है।
4. भौतिक अवस्था का प्रभाव- विषमांगी अभिक्रियाओं (वे अभिक्रियाएं जिनमे अभिकारकों की प्रावस्थाएँ भिन्न-भिन्न होती है) में अभिकारकों की भौतिक अवस्था का भी अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। धातुओं के बारीक चूर्ण ठोस धातुओं की तुलना में तीव्र वेग से अभिक्रिया करते है। इसका कारण यह है कि सतह का क्षेत्रफल अधिक हो जाने के कारण इसके अभिकारकों का सान्द्रण भी बढ़ जाता है।
5. उत्प्रेरक का प्रभाव- वह पदार्थ जो अभिक्रिया के वेग को परिवर्तित कर देता है परन्तु भार व संघटन की दृष्टि से अन्त तक अपरिवर्तित रहता है, उत्प्रेरक कहलाता है। उत्प्रेरक के द्वारा अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करने का कारण संघट्टवाद के द्वारा समझाया गया है क्योकि उत्प्रेरक की उपस्थिति में सक्रियित संकर बनाने हेतु आवश्यक सक्रियण ऊर्जा का मान कम हो जाता है, फलस्वरूप अभिक्रिया कम ताप पर ही तीव्र गति से होने लगती है।
अभिक्रिया का वेग `prop(1)/("सक्रियण ऊर्जा")`
6. अभिकारी पदार्थो की प्रकृति- ध्रुवीय या आयनिक अणुओं के मध्य होने वाली अभिक्रियाएँ (युग्म विच्छेदन व उदासीनीकरण) बहुत तीव्र व शीघ्र हो जाती है, परन्तु वे अभिक्रियाएँ जिनमे आबंधो का पुर्नविन्यास या इलेक्ट्रॉनों का आदान-प्रदान होता है, अधिक समय में होती है। ऑक्सीजन-अपचयन क्रियाओं में सक्रियण ऊर्जा ज्ञात करना सरल नहीं है क्योकि इनमे इलेक्ट्रॉन विनिमय होने के कारण धीमी अभिक्रियाएँ होती है, अतः इनको तीव्र बनाने के लिए ऊर्जा देनी पड़ती है। अतः अभिक्रिया का वेग अभिक्रियाओं में भाग लेने वाले पदार्थो की प्रकृति पर निर्भर करता है।
7. अभिकारकों का पृष्ठ क्षेत्रफल- अभिकारक अणुओं का पृष्ठ क्षेत्रफल अधिक होने पर अभिक्रिया का वेग अधिक होता है क्योकि पृष्ठ क्षेत्रफल अधिक होने के कारण पूर्णतः विभाजित उत्प्रेरक अधिक प्रभावी होते है।
8. माध्यम की प्रकृति- यदि माध्यम की प्रकृति आयनिक या ध्रुवीय होती है तो इनकी अभिक्रिया ध्रुवीय विलायकों में कराने पर, अभिक्रिया का वेग अधिक होता है क्योकि ध्रुवीय विलायकों में अभिकारक आसानी से आयनित हो जाते है, जिससे आयनो के मध्य आकर्षण लगने के कारण अभिक्रिया तीव्र वेग से सम्पन्न होती है, जबकि अध्रुवीय विलायकों में वेग कम होता है।
9. विकिरण प्रभाव- कुछ ऐसी अभिक्रियाएँ होती है, जिनका वेग कम होता है, परन्तु ऐसी अभिक्रियाओं का वेग विशेष विकिरणों के फोटोन की उपस्थिति में बढ़ाया जा सकता। उदाहरणार्थ-`H_(2)` और `Cl_(2)` के मध्य अभिक्रिया का वेग बहुत कम होता है परन्तु प्रकाश की उपस्थिति में अभिकारक विशेष फोटोन विकिरण का अवशोषण कर लेते है, जिससे अभिक्रिया का वेग तीव्र हो जाता है।
`H_(2)(g)+Cl_(2)(g)overset(hv)rarr2HCl(g)`
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