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Class 12
CHEMISTRY
अभिक्रिया की आण्विकता तथा कोटि में अन्तर...

अभिक्रिया की आण्विकता तथा कोटि में अन्तर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

लिखित उत्तर

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किसी अभिक्रिया में भाग लेने वाले अभिकारक पदार्थो के अणुओं की न्यूनतम संख्या को आण्विकता कहते है तथा अभिक्रिया में अभिकारकों के उन अणुओं की वह संख्या जिनका सान्द्रण समय के साथ-साथ अभिक्रिया की प्रगति में परिवर्तित होता है या अणुओं की वह वास्तविक संख्या जो अभिक्रिया के वेग को निर्धारित करती है, अभिक्रिया की कोटि कहलाती है।
उदाहरणार्थ- एथिल ऐसीटेट का कॉस्टिक सोडे (NaOH) के द्वारा जल-अपघटन एक द्विअणुक अभिक्रिया है क्योकि इसमें दोनों अभिकारकों का कम-से-कम एक-एक अणु भाग लेता है। साथ-ही-साथ इस अभिक्रिया में दोनों ही के सान्द्रण परिवर्तन का अभिक्रिया के वेग पर प्रभाव पड़ता है।
`CH_(3)COOC_(2)H_(5)+NaOHrarrCH_(3)COONa+C_(2)H_(5)OH`
अतः एस्टर का क्षारीय जल-अपघटन एक द्विअणुक तथा द्वितीय कोटि की अभिक्रिया है।
जब किसी एस्टर का जल के द्वारा जल-अपघटन करते है तो अभिक्रिया में दो अणु भाग लेते है। अतः यह भी एक द्विअणुक अभिक्रिया है अर्थात इसकी आण्विकता दो होती है, परन्तु इस अभिक्रिया में एस्टर के एक मोल सान्द्रण के परिवर्तित का अभिक्रिया के वेग पर प्रभाव पड़ता है, अर्थात इस अभिक्रिया में केवल एक मोल का सान्द्रण परिवर्तन होता है। इस कारण यह प्रथम कोटि की अभिक्रिया है अर्थात इसमें मैथिल ऐसीटेट के सापेक्ष अभिक्रिया की कोटि एक है, जबकि जल के सापेक्ष अभिक्रिया की कोटि शून्य है।
`underset("मेथिल ऐसीटेट")(CH_(3)COOCH_(3))+HOHoverset(H^(+))rarrunderset("ऐसीटेट अम्ल")(CH_(3)COOH)+underset("मेथिल ऐल्कोहॉल")(CH_(3)OH)`
इसका वेग `prop[CH_(3)COOCH_(3)][H_(2)O]^(0)`
उपर्युक्त अभिक्रिया द्विअणुक तथा प्रथम कोटि की है। वास्तव में, अभिक्रिया की कोटि में सम्पूर्ण अभिक्रिया के विषय में, परन्तु आण्विकता में अभिक्रिया विशेष के पद पर ही विचार करते है।
अतः किसी अभिक्रिया की आण्विकता तथा कोटि एक-सी भी हो सकती है तथा भिन्न-भिन्न भी।
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