जैव भू-रासायनिक चक्र (Bio geo-chemical Cycle)
जैव भू-रासायनिक चक्र प्रकृति में पोषकों के चक्रण को स्पष्ट करता है। जीवमण्डल के जैविक घटक (biotic - components) और अजैविक घटक (abiotic components) के मध्य लगातार परस्पर क्रियाएँ होती रहती है। यही अन्योन्य क्रियाएँ जैवमण्डल को एक गतिज (dynamic) मगर स्थिर (stable) रूप प्रदान करती हैं। इन अन्योन्य क्रियाओं में जीवमण्डल के विभिन्न घटकों के बीचे पदार्थ और ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है। इन्हीं क्रियाओं से जैवमण्डल में सन्तुलन बना रहता है।
जीव अपनी वृद्धि, पोषण आदि हेतु पोषक पदार्थों को स्थलमण्डल,जलमण्डल या वायुमण्डल से ग्रहण करते है। जीवधारी व अजैविक घटकों के बीच पदार्थों का यह विनिमय पदार्थों का चक्रण (cycles of matter) कहलाता है।
जैव भू-रासायनिक चक्र (bio geo-chemical cycle) का अर्थ है कि रसायन (chemical) का पृथ्वी (भू) तथा जीव (bio) के बीच बार-बार चक्रण होता रहता है।
कार्बन चक्र (Carbon cycle)
जीवन को कार्बनिक माना जाता है और कार्बन को जीवन का आधार कार्बन अनेक जैव अणुओं की रीढ़ बनाता है। जैसे-कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन्स, लिपिड्स, नाभिकीय अम्स आदि। अनेक जन्तुओं के बाह्य कंकाल तथा अन्त: कंकाल भी कानिट लवणों से बने होते हैं।
कार्बन के प्रमुख स्रोत सागर (oceans) तथा वायुमण्डल (atmosphere) हैं। महासागर कार्बन के सबसे बड़े स्रोत माने जाते हैं। वायुमण्डल में 0.03 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड पायी जाती है।
प्रकृति में कार्बन शुद्ध रूप में हिरा व ग्रेफाइट में पाया जाता है। मृदा में यह विभिन्न प्रकार के खनिजों के रूप में पाया जाता है। जैसे कार्बोनेट व बाइकार्बोनेट आदि।
पादपों में कार्बन, मृदा से नहीं बल्कि वायुमण्डल से प्रवेश करता है। प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में हरे-पौधे कार्बन डाइऑक्साइड का कच्चे माल के रूप में प्रयोग कर इसे कार्बोहाइड्रेट्स में बदल देते हैं। इन्हीं से अन्य पदार्थों जैसे लिपिड्स, प्रोटीन्स, नाभिकीय अम्ल आदि का निर्माण होता है। प्रकाश संश्लेषण वह प्रक्रिया है जो कार्बन को जीव जगत में प्रविष्ट कराती है। जन्तु प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अपना भोजन पौधों से प्राप्त करते हैं। इस तरह कार्बन पौधों से शाकाहारी जन्तुओं में और शाकाहारी जन्तुओं से मांसाहारी जन्तुओं में पहुँचता है।
सभी पादपों व जन्तुओं की कोशिकाओं में होने वाले कोशिकीय श्वसन में कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त होती है जो वायुमण्डल में मुक्त हो जाती है। पादपों व जन्तुओं की मृत्यु होने पर अपघटनकर्ता इनके शरीर में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों को कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में मुक्त कर देते हैं। बैक्टीरिया व फजाई प्रकृति में प्रमुख अपघटनकर्ता जीव हैं।
दहन (combustion) की क्रिया में, जहाँ लकड़ी या जीवाश्म ईंधन का प्रयोग खाना पकाने, गर्म करने (ऊष्मा प्राप्त करने), यातायात या उद्योगों में होता है, के द्वारा वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड का प्रवेश होता है। औद्योगिक क्रांति (industrial revolution) के बाद से जीवाश्म ईंधनों के प्रयोग में बहुत भारी बढ़ोतरी हुई है। इस कारण वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा दो गुनी हो गयी है। कार्बन का विभिन्न भौतिक व जैविक क्रियाओं द्वारा चक्रण होता है। कार्बन डाइऑक्साइड, वनों की आग, ज्वालामुखीय गतिविधि आदि द्वारा भी वायुमण्डल में प्रवेश करती है।
ऑक्सीजन चक्र (Oxygen cycle)
पृथ्वी पर पाए जाने वाले अधिकांश जीवधारियों को श्वसन हेतु ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। वायुमण्डल में यह तत्व के रूप में, अर्थात् मुक्त अवस्था में पायी जाती है व इसकी मात्रा 21 प्रतिशत है। साथ ही यह बड़ी मात्रा में भूपर्पटी (earthcrust) में यौगिकों के रूप में भी पायी जाती है। वायुमण्डल में पायी जाने वाली कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में भी ऑक्सीजन उपस्थित होती है। संयुक्त अर्थात् यौगिकों के रूप में यह भूपर्पटी में ऑक्साइड के रूप में पायी जाती है। इनमें से प्रमुख हैं-कार्बोनेट, सल्फेट, नाइट्रेट आदि। अनेक जैव अणुओं प्रकाश संश्लेषण | जैसे कार्बोहाइड्रेट्स, लिपिड्स, प्रोटीन्स, नाभिकीय अम्ल आदि का भी यह आवश्यक घटक है। ये सभी ऑक्सीजन के स्रोत हैं लेकिन प्रमुख स्रोत . वायुमण्डलीय ऑक्सीजन ही है। ऑक्सीजन को सभी जीवधारी श्वसन के लिए प्रयोग करते हैं लेकिन ऑक्सीजन चक्र के कारण वायुमण्डल में ऑक्सीजन की मात्रा स्थिर बनी रहती है। ऑक्सीजन चक्र अग्रलिखित प्रकार संचालित होता है
(i) जीवधारी श्वसन हेतु ऑक्सीजन वायुमण्डल से प्राप्त करते हैं। जलीय जीव जल में घुलित ऑक्सीजन का प्रयोग करते है। यह कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में वायुमण्डल में या जल में वापस कर दी जाती है।
(ii) हरे पौधे कार्बन डाइऑक्साइड व जल के रूप में ऑक्सीजन का प्रयोग प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में करते हैं। यह पौधे जल की आण्विक ऑक्सीजन को पर्यावरण में मुक्त कर देते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड में उपस्थित ऑक्सीजन कार्बनिक पदार्थों के निर्माण में प्रयुक्त हो जाती है। यह ऑक्सीजन पौधों से जन्तुओं में भोजन के रूप में भी पहुँचाती है।
(iii) प्रकृति में प्रकाश संश्लेषण व श्वसन को एक-दूसरे का पूरक माना जाता है। यह दो क्रियाएँ प्रमुखतः वायुमण्डल में, ऑक्सीजन व कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा का नियमन व चक्र पूर्ण करती हैं। वायुमण्डल में ऑक्सीजन केवल प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा वापस लौटती है।(iii) प्रकृति में प्रकाश संश्लेषण व श्वसन को एक-दूसरे का पूरक माना जाता है। यह दो क्रियाएँ प्रमुखतः वायुमण्डल में, ऑक्सीजन व कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा का नियमन व चक्र पूर्ण करती हैं। वायुमण्डल में ऑक्सीजन केवल प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा वापस लौटती है।
