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BIOLOGY
ओजोन परत का अपक्षय चिन्ता का विषय क्यों ...

ओजोन परत का अपक्षय चिन्ता का विषय क्यों है? इसकी क्षति को सीमित करने के लिए क्या उपाय किये जा रहे हैं?

लिखित उत्तर

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विभिन्न रासायनिक कारणों से ओजोन परत को क्षति बहुत तेजी से हो रही क्लोरोफ्लोरोकार्बन की वृद्धि के कारण ओजोन परत में छिद्र उत्पन्न हो गए हैं जिनसे सूर्य के प्रकाश में विद्यमान पराबैंगनी विकिरणें सीधे पृथ्वी पर आने लगी है जो कैंसर और त्वचा रोगों के कारण बन रहे हैं। ओजोन परत पैराबैंगनी (UV) विकिरणों का अवशोषण कर लेती है। इस क्षति को सीमित करने के लिए 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UHEP) में सर्वसम्मति यही बनी है कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन `(CFC_(8))` के उत्पादन को 1986 के स्तर पर सीमित रखा जाए। माट्रियल प्रोटोकॉल में 1987 में सन् 1998 तक क्लोरोफ्लोरोकार्बन के प्रयोग में 50% की कमी करने की बात कही गई। सन् 1992 में माट्रियल प्रोटोकॉल की मीटिंग में 1996 तथा `CFC_(5)`, पर धीरे धीरे रोक लगाने को स्वीकार किया गया। अब क्लोरोफ्लोरोकार्बन फ्लोरो की जगह हाइड्रो कार्बनों का प्रयोग आरंभ किया गया है जिसमें ओजोन परत को क्षति पहुंचाने वाले क्लोरीन या ब्रोमीन नहीं है। जनसामान्य में इसके प्रति सजगता लगभग नहीं है।
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