Home
Class 10
PHYSICS
एक विद्युत जनित्र का नामांकित चित्र द्वा...

एक विद्युत जनित्र का नामांकित चित्र द्वारा अधः स्थायी (underlying) सिद्धान्त का वर्णन कीजिए। ब्रशों का क्या कार्य है?

लिखित उत्तर

Verified by Experts

ऐसी युक्ति जिसके द्वारा दिस्ट धारा प्राप्त होती है उसे D.C. डायनमों (जनित्र) कहते हैं। DC जनित्र में विभक्त वलय (अद्धरिंग) प्रकार का दिक्परिवर्तक होता है। इस व्यवस्था में एक ब्रुश सदैव ही उस भुजा के सम्पर्क में रहता है जो चुम्बकीय क्षेत्र में ऊपर की ओर गति करती है। जबकि दूसरा बुश सदैव नीचे की ओर गति करनेवाली भुजा के सम्पर्क में रहता है। शक्तिशाली नाल चुम्बक के विपरीत ध्रबों के बीच आयताकार चालकतार की कुंडली होती है जिसे आर्मेचर कहते हैं। कुण्डली का एक छोर पीतल के अर्द्धरिंग R, से तथा दूसरा छोर पीतल के अर्द्धरिंग R, से जुड़ा रहता है। आर्मेचर घूमने के क्रम में अर्द्धरिंग R, तथा R, कार्बन ब्रश B, तथा B, से स्पर्श करते हुए घूमता है। ब्रश Rखंड घनात्मक ध्रव होता है तब B, ब्रश इसके संपर्क में रहता है। घूर्णनक्रम में जब R,ऋणात्मक बन जाता है तो इसका संपर्क B. ब्रश से हो जाता है तथा B का संपर्क R, खंड से हो जाता है। इस तरह ब्रशं Bधनात्मक तथा B, ऋणात्मक विभव पर बने रहते हैं। ऐसा रहने पर आर्मेचर की धारा की दिशा बदलने पर भी बाह्य परिपथ में धारा की दिशा हमेशा एक ही दिशा में रहती है जो शून्य से अधिकतम मान के बीच बदलता है। इसलिए ऐसे डायनेमो से दिष्टधारा (D.C.) प्राप्त होती है।
Promotional Banner

टॉपर्स ने हल किए ये सवाल

  • ANNUAL EXAMINATION - 2012

    JHARKHAND BOARD PREVIOUS YEAR PAPERS|Exercise विज्ञानं-प्रोयोगिक खण्ड-अ |8 Videos
  • ANNUAL EXAMINATION - 2012

    JHARKHAND BOARD PREVIOUS YEAR PAPERS|Exercise विज्ञानं-प्रोयोगिक खण्ड-b|3 Videos
  • ANNUAL EXAMINATION - 2011

    JHARKHAND BOARD PREVIOUS YEAR PAPERS|Exercise विज्ञान :- खण्ड ब|3 Videos
  • ANNUAL EXAMINATION - 2020

    JHARKHAND BOARD PREVIOUS YEAR PAPERS|Exercise विज्ञानं GROUP - B|2 Videos