ओम के नियम को प्रयोग द्वारा प्रमाणित करने के लिए सर्वप्रथम चाक तार, आमीटर, वोल्टमीटर, दाब कुंजी, बैटरी, परिवर्तनशील प्रतिरोध इत्यादि लेकर चित्रानुसार सजा दिया जाता है | आमीटर को श्रेणीक्रम तथा वोल्टमीटर को समान्तरक्रम में जोड़ा जाता है |
अब दाब कुंजी दबाकर बैटरी से धरा प्रवाहित की जाती है आमीटर (A) से धरा का मान तथा वोल्टमीटर (V) से विभवांतर का मान ज्ञात हो जाता है | परिवर्तनशील प्रतिरोध को स्लाइड पर आगे - पीछे खिसकाकर प्रयोग को बार - बार दुहराया जाता है | अलग - अलग स्थितियों में आमीटर से धरा का मान तथा वोल्टमीटर से विभवांतर का मान ज्ञात कर लिया जाता है | प्राप्त मान को देखने से पता चलता है कि विभवांतर का मान आधा होने पर धरा का मान भी आधा हो जाता है इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि चालक के सिरों के बीच का विभवांतर उस चालक से प्रवाहित होने वाली धारा का सीधा समानुपाती होता है |
अब विभवांतर (V) को x-अक्ष पर तथा धारा (I) को y-अक्ष पर रखकर एक ग्राफ खींचा जाता है तो एक सरल रेखा के रूप में प्राप्त होती है जो ओम के नियम को साबित करती है |