विलयन दो या दो से अधिक अवयवों का समांगी मिश्रण होता है। जिसका संघटन निश्चित परिसीमाओं के अंतर्गत ही परिवर्तित हो सकता है किसी विलयन में उपस्थित अवयवों की कुल संख्या के आधार पर इन्हे द्विअंगी विलयन (दो अवयव ) त्रिअंगी विलयन (तीन अवयव ) , चतुरंगी विलयन (चार अवयव ) आदि कहा जाता है।
द्विअंगी विलयन के अवयवों को सामान्यतः विलेय तथा विलायक कहा जाता है सामान्यतः जो अधिक मात्रा में उपस्थित होता है ,वह विलायक कहलाता है , जबकि मात्रा में उपस्थित अन्य अवयव विलेय कहलाता है उदाहरणार्थ -यदि चीनी के कुछ क्रिस्टलो को जल से भरे बीकर में डाला जाता है तो ये जल में घुलकर विलयन बना लेते है। इस स्थिति में चीनी विलेय तथा जल विलायक है।
विलयन में कणो का आण्विक आकार लगभग पिकोमीटर होता है तथा इसके विभिन्न अवयवों को किसी बभी भौतिक विधि जैसे फिल्टरीकरण ,निथारन ,अभिकेन्द्रीकरण आदि के द्वारा पृथकृत नहीं किया जा सकता है ।
विलयन के प्रकार
विलेय तथा विलायक की भौतिक अवस्था के आधार पर विलयनों को निम्नलिखित प्रकारो में वर्गीकृत किया जा सकता है -
उपर्युक्त नो प्रकार के विलयनों में से तीन विलयन - द्रव में ठोस , द्रव में गैस तथा द्रव अतिसामान्य विलयन है। इन तीनो प्रकार के विलयनों में द्रव विलायक के रूप में होता है वे विलयन जिनमे जल विलायक के रूप में होता है जलीय विलयन कहलाते है , जबकि जिन विलयनों में जल विलायक के रूप में नहीं होता अजलीय विलयन कहलाते है सामान्य अजलीय विलायकों के उदाहरण है - ईथर , बेंजीन ,कार्बन टेट्राक्लोराइड आदि।