Home
Class 12
CHEMISTRY
बर्कले -हार्टले विधि परासरण दाब निर्धारण...

बर्कले -हार्टले विधि परासरण दाब निर्धारण की उत्तम विधि क्यों है ?

लिखित उत्तर

Verified by Experts

परासरण दाब - किसी विलयन तथा विलायक को अर्द्धपारगम्य झिल्ली द्वारा पृथक करके उसके परासरण को रोकने के लिए विलयन पर कम - से - कम जितना बाह्य दाब लगाना पड़ता है , उसे विलयन का परासरण दाब कहते है।
बर्कले -हार्टले विधि से परासरण दाब का निर्धारण - यह जलीय विलयनों के परासरण दाब निर्धारण की सबसे उपयुक्त विधि है। इस विधि में एक सरंध्र पात्र के छिद्रो में विद्युत किया जाता है इस सरन्ध्र पाते में शुद्ध जल भरकर इसे एक बेलनाकार पात्र में स्थिर करते है बेलनाकार पात्र में वह विलयन भार किया जाता है , जिसका परासरण दाब ज्ञात करना होता है। बेलनाकार पात्र में बाहरी सतह पर गनमेटल की तह चढ़ी रहती है। जो बाहरी ताप व दाब से इसे अप्रभावित रखती है। इससे एक पिस्टन तथा दाबमापी यंत्र जुड़ा होता है।

प्रयोग के प्रारम्भ में सरंध्र पात्र में लगी पतली नली में जल का रपराम्भिक तल लिख लिया जाता है अब बेलनाकार पात्र में विलयन भर लिए जाता है , जिससे परासरण की क्रिया प्रारम्भ हो जाती है और जल (शुद्ध विलायक ) विलयन की और परासरित होने लगता है इस परासरण के कारण पतली नली में जल का तल गिरने (कम होने ) लगता है। कुछ समय बाद इस स्थिति में , पिस्टन द्वारा विलयन पर कम - से - कम दाब डालकर पतली नली (केशनली ) में जल का ताल गिरने से रोका जाता है , जिससे जल का ताल अपनी प्रारम्भिक स्थिति में पहुँच जाए। इस दाब को उपकरण में लगे दाबमापी (मेनोमीटर )से ज्ञात कर लेते है। यह दाब विलयन में परासरण दाब के बराबर होता है। इस प्रकार बर्कले - हार्टले विधि द्वारा उस जलीय विलयन का वाष्प दाब ज्ञात कर लेते है।
Promotional Banner