एक संकर संकरण प्रयोगों के अपने प्रेक्षण को आधार बनाकर मेंडल ने इनकी वंशागति संबंधी अपनी समझ के सार रूप में दो सामान्य नियम प्रस्तावि किए । उनमें से एक नियम है प्रभाविता नियम (लॉ ऑफ डोमिनेस) । प्रभाविता नियम के अनुसार-(क) लक्षणों का निर्धारण कारक नामक विविक्त (डिस्क्रीट) इकाइयों द्वारा होता है । (ख) कारक जोड़ों में होते हैं । (ग) यदि कारक जोडों के दो सदस्य असमान हों तो इनमें से एक कारक दसरे कारक पर प्रभावी हो जाता है अर्थात् एक .प्रभावी. और दूसरा .अप्रभावी. होता है । (घ) `F_(1)` में केवल एक जनक लक्षण का प्रकट होना तथा `F_(2)` में दोनों जनक लक्षणों का प्रकट होना प्रभाविता के नियम के द्वारा समझा जा सकता है । इससे यह भी स्पष्ट होता है कि `F_(2)` में 3 : 1 का अनुपात क्यों पाया जाता है।
