अंडवाहिनी (Oviduct), गर्भाशय (Uterus), योनि (Vagina), क्लाइटोरिस (Clitoris) एवं सहायक जनन ग्रंथियाँ।
वह अवघि जिसके दौरान मानव मादा में संतान पैदा करने की क्षमता होती है, उसे जनता काल (fertility period) कहते हैं। स्त्रियों में यह 12-13 वर्ष की आयु (यौवनारम्भ) से 45-50 वर्ष (रजोनिवृत्ति menopause) तक चलता है।
यौवनारम्भ के बीच मादा जनन-तंत्र में एक नियमित मासिक घटनाचक्र चलता रहता है, जिसे रजोचक्र रजोचक्र कहते हैं। रजोचक्र के दौरान होने वाली घटनाएँ इस प्रकार है-(i) प्रत्येक रजोचक्र में हर 28 दिन में एक अण्डा परिपक्व होकर निकलता है। (ii) रजोचक्र का आरम्भ रज-प्रवाह से होता है जिसके दौरान गर्भाशय का कोशिकीय अस्तर उतरकर बाहर निकलता है और उसके साथ-साथ रक्त प्रवाह होता है। यह प्रक्रिया 34 दिनों तक चलती रहती है। (iii) रजोचक्र के आरंभ होने से पाँचवें से लेकर तेरहवें दिन तक माफियन फॉलिकल (graafian follicle) की वृद्धि होती है और उसका परिपक्वन होता है। इस फॉलिकल में एक अण्डाणु होता है जिसे घेरती हुई कोशिकाओं की एक सहमति होती है। (iv) ग्राफियन फॉलिकल से एक हार्मोन ईस्ट्रीपान (oestrogen) निकलता है जो गर्भाशय में अण्डाणु को प्राप्त करने की तैयारी के लिए उत्तेजित करता है। (v) गर्भाशय का अस्तर बनाने वाली कीशिकाएँ तेजी से वृद्धि करती है और रक्त वाहिकाओं का एक घर जाल बन जाता है। (vi) अण्डाशय से अण्डे का निकलना अण्डोत्सर्ग कहलाता है। अण्डोत्सर्ग जोच के आरंभ होने के 12-14 दिन बाद होता है। प्रोफियन फॉलिकल फूटकर अण्डा गर्भाशय आ जाता है। (vii) फूट-चुके फॉलिकल की कोशिकाएँ कार्पस ल्यूटियम का रूप ले लेती है जिससे प्रोजेस्ट्रेरॉन (progesterone) का साब निकलता है। (viii) अण्डा फैलोपियन कलिका नलिका में से होते हुए तेरहवें अथवा चीदहवें दिन गर्भाशय में पहुँचता है जहाँ वह सोलहवें दिन तक यानि 48-73 घण्टे तक) कायम रहता है। (ix) यदि इस दौरान अण्डे को किसी शुक्राणु के मिलन का संयोग नहीं होता तो उसका अपक्षय होने लगता है। अटूठाइसवें दिन के अंत में अण्डा और उसके साथ-साथ गर्भाशय अस्तर भी बाहर निकल जाते हैं। (x) यह समय होता है गर्भाशय के मोटे अस्तर के धीमे विघटन का आंरभ होना।
