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Class 12
PHYSICS
सिद्धांत के साथ एक साइक्लोट्रॉन की संरचन...

सिद्धांत के साथ एक साइक्लोट्रॉन की संरचना तथा कार्यविधि का वर्णन करें।

लिखित उत्तर

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साइक्लोट्रॉन का सिद्धांत- प्रत्यावर्ती धारा के उपयोग से शक्‍तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र में प्रत्यावर्ती विद्युत क्षेत्र उत्पन्न कर आवेशित कण को बार बार उसी विद्युत क्षेत्र से cross कराने पर आवेशित कण अत्यधिक गतिज ऊर्जा प्राप्त कर सकता है।
संरचना-इसमें दो D- आकार की खोखली चकती होती है जिन्हें `D_(1)` तथा `D_(2)` डीज कहते हैं। दोनों डीज एक दूसरे से थोड़ी दूरी पर रखा गया है। डीज को विभवांतर पर रखा जाता है जो उसी पॉलरिटी पर है जैसा कि आवेशित कण हैं दोनों डीज को एक स्टील के बीच में इलेक्ट्रोमैग्नेट के बीच रखा जाता है। चुम्बकीय क्षेत्र डी के तल के लंबवत होती है।

कार्य-(i)धनायन (प्रोटॉन, `alpha`- कण इत्यादि) को धीमी चाल से किसी आयन स्त्रोत S को डीज में प्रवेश कराया जाता है।
यह आवेश `T//2` समय में अर्द्धवृत्ताकार D में गमन करता है तथा पूर्ण वृत्ताकार पथ पूरा करने में T समय लगता है जो कि D के प्रत्यावर्ती विभवांतर का समय भी है।
(ii)माना कि पहले D को आवेश पूर्ण गनम का बाहर निकलता है तथा दोनों डीज के वीच चित्र () को अनुसार है तथा गैस के अनुदिश विद्युतीय क्षेत्र के कारण वह `D_(2)` से चला जाता है तथा वां विद्युतीय क्षेत्र शून्य होने के कारण वह अर्द्धवृत्ताकार पथ पर गमन कर गतज ऊर्जा `qV` प्राप्त करता है।
(iii)T//2 समय के बाद जब वह चित्र वाली स्थिति में पहुंचा है तो अब ऋणात्मक ध्रुव धनात्मक में परिवर्तित हो जाता है तब वह धनात्मक `D_(1)` में चलाजाता है तथा उसके `T//2` समय में अर्द्धवृत्ताकार पथ पर गमन पूरा का पुनः `q^(1)` गतिज ऊर्जा प्राप्त करता है।
(iv) इस प्रकार प्रत्येक अर्द्धचक्कर के बाद `qV` ऊर्जा कण प्राप्त करता है तथा उस समय एक स्थिर वैद्युत क्षेत्र कण पर आरोपित हो उसे लक्ष्य की ओर प्रक्षेपित कर देता है।
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