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संयुक्त राष्ट्र महासभा|सुरक्षा परिषद|आर्...

संयुक्त राष्ट्र महासभा|सुरक्षा परिषद|आर्थिक एवं सामाजिक परिषद|अंतराष्ट्रीय न्यायालय|OMR

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United Nations General Assembly (संयुक्त राष्ट्र महासभा) |Economic And Social Council (आर्थिक और सामाजिक परिषद)|OMR

United Nations General Assembly (संयुक्त राष्ट्र महासभा) |Economic And Social Council (आर्थिक और सामाजिक परिषद)|OMR

प्रथम विश्व युध्द |राष्ट्रसंघ के सदस्य राष्ट्र|राष्ट्रसंघ के अंग | राष्ट्रसंघ के द्वारा शांति के प्रयास-युध्द |अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने में भूमिका राष्ट्रसंघ| राष्ट्रसंघ की सफलता और असफलता के कारण |संयुक्त राष्ट्रसंघ के लक्ष्य एवं उदेश्य |संयुक्त राष्ट्रसंघ के सिद्धांत |संयुक्त राष्ट्रसंघ के अंग |इस संगठन के मुख्यतः 4 उदेश्य है |विश्वशांति की दिशा में उसके प्रयास उल्लेखनीय है

United Nations ( संयुक्त राष्ट्र)|OMR

United Nations ( संयुक्त राष्ट्र)|OMR

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए: गांधीजी सत्य और अहिंसा को जीवन में सर्वाधिक महत्व देते थे, सत्याग्रह व असहयोग आंदोलन द्वारा उन्होंने अंग्रेजों का मुकाबला किया। गांधीजी सब मनुष्यों को समान मानते थे। धर्म, जाति, संप्रदाय, रंग आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को वे मानवता का कलंक मानते थे। वे आर्थिक असमानता को भी मिटा डालना चाहते थे। सामाजिक न्याय, शारीरिक श्रम को महत्व देते थे। गांधीजी प्रजातांत्रिक राज्य को कल्याणकारी मानते थे। गांधीजी के अनुसार, नैतिक आचरण का जीवन में विशेष स्थान होना चाहिए। सत्य, न्याय, धर्म, अहिंसा, अपरिग्रह, निःस्वार्थ सेवा को मानवता के लिए सच्ची सेवा मानते थे। उनके राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय विचारों में वसुधैव कुटुम्बकम का दृष्टिकोण प्रमुख था। उनकी मान्यता थी कि किसी राष्ट्र का समुचित उत्थान अपने परिवार, जाति, गांव, प्रदेश तथा देश की समस्याओं के सुधार से हो सकता है। स्वयं को सुधारों, सारा विश्व सुधरेगा उनका कहना सही था। निम्न में से स्त्रीलिंग कौन-सा है?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 81 से 85 तक के उत्तर दीजिए: गांधीजी सत्य और अहिंसा को जीवन में सर्वाधिक महत्व देते थे, सत्याग्रह व असहयोग आंदोलन द्वारा उन्होंने अंग्रेजों का मुकाबला किया। गांधीजी सब मनुष्यों को समान मानते थे। धर्म, जाति, संप्रदाय, रंग आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को वे मानवता का कलंक मानते थे। वे आर्थिक असमानता को भी मिटा डालना चाहते थे। सामाजिक न्याय, शारीरिक श्रम को महत्व देते थे। गांधीजी प्रजातांत्रिक राज्य को कल्याणकारी मानते थे। गांधीजी के अनुसार, नैतिक आचरण का जीवन में विशेष स्थान होना चाहिए। सत्य, न्याय, धर्म, अहिंसा, अपरिग्रह, निःस्वार्थ सेवा को मानवता के लिए सच्ची सेवा मानते थे। उनके राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय विचारों में वसुधैव कुटुम्बकम का दृष्टिकोण प्रमुख था। उनकी मान्यता थी कि किसी राष्ट्र का समुचित उत्थान अपने परिवार, जाति, गांव, प्रदेश तथा देश की समस्याओं के सुधार से हो सकता है। स्वयं को सुधारों, सारा विश्व सुधरेगा उनका कहना सही था। सत्याग्रह' में कौन-सी सन्धि है?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 81 से 85 तक के उत्तर दीजिए: गांधीजी सत्य और अहिंसा को जीवन में सर्वाधिक महत्व देते थे, सत्याग्रह व असहयोग आंदोलन द्वारा उन्होंने अंग्रेजों का मुकाबला किया। गांधीजी सब मनुष्यों को समान मानते थे। धर्म, जाति, संप्रदाय, रंग आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को वे मानवता का कलंक मानते थे। वे आर्थिक असमानता को भी मिटा डालना चाहते थे। सामाजिक न्याय, शारीरिक श्रम को महत्व देते थे। गांधीजी प्रजातांत्रिक राज्य को कल्याणकारी मानते थे। गांधीजी के अनुसार, नैतिक आचरण का जीवन में विशेष स्थान होना चाहिए। सत्य, न्याय, धर्म, अहिंसा, अपरिग्रह, निःस्वार्थ सेवा को मानवता के लिए सच्ची सेवा मानते थे। उनके राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय विचारों में वसुधैव कुटुम्बकम का दृष्टिकोण प्रमुख था। उनकी मान्यता थी कि किसी राष्ट्र का समुचित उत्थान अपने परिवार, जाति, गांव, प्रदेश तथा देश की समस्याओं के सुधार से हो सकता है। स्वयं को सुधारों, सारा विश्व सुधरेगा उनका कहना सही था। 'अ' उपसर्ग है