Home
Class 10
SOCIAL SCIENCE
कांग्रेस की स्थापना|उदारवादी दल और उग्रर...

कांग्रेस की स्थापना|उदारवादी दल और उग्रराष्ट्रवादी दल|उग्र राष्ट्रवाद के उदय के कारण|भारतीय राष्ट्रीय जागृति में धार्मिक एवं सामाजिक सुधार आन्दोलन|OMR

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

राष्ट्रवाद|यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय|फ्रांसीसी क्रांति|राष्ट्र की भावना की रचना|नेपोलियन|जनता की प्रतिक्रिया|क्रांति के पहले की स्थिति|OMR

राष्ट्रवाद|यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय|फ्रांसीसी क्रांति|राष्ट्र की भावना की रचना|नेपोलियन|जनता की प्रतिक्रिया|क्रांति के पहले की स्थिति|OMR

राष्ट्रवाद|यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय|फ्रांसीसी क्रांति|राष्ट्र की भावना की रचना|नेपोलियन|जनता की प्रतिक्रिया|क्रांति के पहले की स्थिति|OMR

प्रथम विश्व युध्द |राष्ट्रसंघ के सदस्य राष्ट्र|राष्ट्रसंघ के अंग | राष्ट्रसंघ के द्वारा शांति के प्रयास-युध्द |अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने में भूमिका राष्ट्रसंघ| राष्ट्रसंघ की सफलता और असफलता के कारण |संयुक्त राष्ट्रसंघ के लक्ष्य एवं उदेश्य |संयुक्त राष्ट्रसंघ के सिद्धांत |संयुक्त राष्ट्रसंघ के अंग |इस संगठन के मुख्यतः 4 उदेश्य है |विश्वशांति की दिशा में उसके प्रयास उल्लेखनीय है

केंद्र शासित प्रदेश|भारत में संघीय व्यवस्था की सफलता के कारण|भाषायी राज्य|भाषा निति|करंद और राज्य के रिश्ते|OMR|Quiz

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये इस संसार की यही रीति है। सत्यवादी मारा जाता है। आज से सहस्त्रों वर्ष पूर्व ग्रीस देश में एक दार्शनिक रहा करता था। उसका नाम सुकरात था। उसकी बातें सीधी-सच्ची पर तीखी होती थी। समाज उन्हें सह नहीं सका और उसे कानूनी आज्ञा का पालन करते हुए विष का प्याला पीना पड़ा, इसी प्रकार तत्कालीन शासन-सत्ता तथा सामाजिक और धार्मिक दुराचारों के विरुद्ध आवाज उठाने पर ईसा को सूली पर चढ़ना पड़ा, इसी प्रकार तत्कालीन शासन-सत्ता तथा सामाजिक और धार्मिक दुराचारों के विरुद्ध आवाज उठाने पर ईसा को सूली पर चढ़ना पड़ा। सलीब पर से ईसा का यह आर्तनाद आज भी गूंज रहा है-हे प्रभु, हे पिता, तुम हमें क्यों भूल गए हो? साम्प्रदायिक विष को शान्त करने और लोगों में साम्प्रदायिक सद्भावना फैलाने के लिए गांधीजी अपने जीवन की बाजी लगाकर एक स्थान से दूसरे स्थान घूमते फिरे अन्त में उन्हें गोली का शिकार होना पड़ा। इन दृष्टान्तों की पुनरावृत्ति अभी हाल ही में अमरीका में हुई है वहां के काले लोगों को उनके रंग और जाति के दुर्व्यवहारों से मुक्ति दिलाकर समाज में समुचित स्थान दिलाने को डॉ. किंग ने अहिंसक आन्दोलन खड़ा किया था। उन्होंने चाहा कि अमरीका के गोरे लोगों में हृदय परिवर्तन हो और वे नीग्रो अमरीकनों को नौकरी में और सामाजिक प्रतिष्ठा में वहीं स्थान पाने दें जो श्वेत अमरीकनों को मिलता है, लेकिन उसका भी निर्भीक सच्चाई बरतने का मूल्य अपने प्राण देकर चुकाना पड़ा। आज संसार के सामने वही पुराना प्रश्न फिर खड़ा हो गया है। क्या दुनिया में सच कहने वालों का और इंसाफ मांगने वालों को अन्त इसी प्रकार होता रहेगा? क्या आपसी विद्वेष को समाप्त करने की सम्भावना इस दुनिया में सबको पसन्द नहीं होगी? धार्मिक एवं सामाजिक दुराचारों के विरुद्ध आवाज उठाने पर किसे सूली पर चढ़ना पड़ाः

इतिहास भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन |भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण केंद्र |भूगोल जल संसाधन बाँध |कृषि चावल एवं गेहूँ के प्रमुख क्षेत्र |बड़े उत्पादक राज्य

हमारे देश के त्योहार चाहे धार्मिक दृष्टि से मनाए जा रहे हैं या नए वर्ष के आगमन के रूप में फसल की कटाई एवं खलिहानों के भरने की खुशी में हों या महापुरुषों की याद में सभी देश की राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक एकता और अखंडता को मजबूती प्रदान करते हैं। ये त्योहार जनमानस में उल्लास, उमंग एवं खुशहाली भर देते हैं, ये हमारे अंदर देश-भक्ति एवं गौरव की भावना के साथ-साथ, विश्व-बंधुत्व एवं समन्वय की भावना भी बढ़ाते हैं। इनके द्वारा महापुरुषों के उपदेश हमें इस बात की याद दिलाते हैं कि सदविचार एवं सद्भावना द्वारा ही हम प्रगति की ओर बढ़ सकते हैं। इन त्योहारों के माध्यम से हमें यह भी संदेश मिलता है कि वास्तव में धर्मो का मूल लक्ष्य एक है, केवल उस लक्ष्य तक पहुँचने के तरीके अलग-अलग हैं। 'अलग-अलग तरीके' के माध्यम से किस ओर संकेत किया गया है?

हमारे देश के त्योहार चाहे धार्मिक दृष्टि से मनाए जा रहे हैं या नए वर्ष के आगमन के रूप में फसल की कटाई एवं खलिहानों के भरने की खुशी में हों या महापुरुषों की याद में सभी देश की राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक एकता और अखंडता को मजबूती प्रदान करते हैं। ये त्योहार जनमानस में उल्लास, उमंग एवं खुशहाली भर देते हैं, ये हमारे अंदर देश-भक्ति एवं गौरव की भावना के साथ-साथ, विश्व-बंधुत्व एवं समन्वय की भावना भी बढ़ाते हैं। इनके द्वारा महापुरुषों के उपदेश हमें इस बात की याद दिलाते हैं कि सदविचार एवं सद्भावना द्वारा ही हम प्रगति की ओर बढ़ सकते हैं। इन त्योहारों के माध्यम से हमें यह भी संदेश मिलता है कि वास्तव में धर्मो का मूल लक्ष्य एक है, केवल उस लक्ष्य तक पहुँचने के तरीके अलग-अलग हैं। निम्नलिखित में से कौन-सा त्योहार किसी महापुरुष से नहीं जुड़ा है?