एक बार कम, एक बार ज्यादा
एक बार कम, एक बार ज्यादा
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जागो फिर एक बार ! प्यारे जगाते हुए हारे सब तारे तुम्हें अरुण-पंख तरुण-किरण खड़ी खोलती है द्वार जागो फिर एक बार! आँखें अलियों-सी किस मधु की गलियों में फंसी, बन्द कर पाँखें पी रही हैं मधु मौन अथवा सोई कमल-कोरकों में? बन्द हो रहा गुंजार जागो फिर एक बार! अस्ताचल चले रवि, शशि-छवि विभावरी में चित्रित हुई है देख यामिनीगन्धा जगी. एकटक चकोर-कोर दर्शन-प्रिय, आशाओं भरी मौन भाषा बहु भावमयी घेर रहा चन्द्र को चाव से शिशिर-भार-व्याकुल कुल खुले फूल झुके हुए, आया कलियों में मधुर मद-उर-यौवन उभार जागो फिर एक बार! इनमें से किसकी तुलना अरुण-पंखों से की गई है?
जागो फिर एक बार ! प्यारे जगाते हुए हारे सब तारे तुम्हें अरुण-पंख तरुण-किरण खड़ी खोलती है द्वार जागो फिर एक बार! आँखें अलियों-सी किस मधु की गलियों में फंसी, बन्द कर पाँखें पी रही हैं मधु मौन अथवा सोई कमल-कोरकों में? बन्द हो रहा गुंजार जागो फिर एक बार! अस्ताचल चले रवि, शशि-छवि विभावरी में चित्रित हुई है देख यामिनीगन्धा जगी. एकटक चकोर-कोर दर्शन-प्रिय, आशाओं भरी मौन भाषा बहु भावमयी घेर रहा चन्द्र को चाव से शिशिर-भार-व्याकुल कुल खुले फूल झुके हुए, आया कलियों में मधुर मद-उर-यौवन उभार जागो फिर एक बार! फूलों के झुकने का कारण क्या है?
जागो फिर एक बार ! प्यारे जगाते हुए हारे सब तारे तुम्हें अरुण-पंख तरुण-किरण खड़ी खोलती है द्वार जागो फिर एक बार! आँखें अलियों-सी किस मधु की गलियों में फंसी, बन्द कर पाँखें पी रही हैं मधु मौन अथवा सोई कमल-कोरकों में? बन्द हो रहा गुंजार जागो फिर एक बार! अस्ताचल चले रवि, शशि-छवि विभावरी में चित्रित हुई है देख यामिनीगन्धा जगी. एकटक चकोर-कोर दर्शन-प्रिय, आशाओं भरी मौन भाषा बहु भावमयी घेर रहा चन्द्र को चाव से शिशिर-भार-व्याकुल कुल खुले फूल झुके हुए, आया कलियों में मधुर मद-उर-यौवन उभार जागो फिर एक बार! किसमें यौवन का उभार आया है?
जागो फिर एक बार ! प्यारे जगाते हुए हारे सब तारे तुम्हें अरुण-पंख तरुण-किरण खड़ी खोलती है द्वार जागो फिर एक बार! आँखें अलियों-सी किस मधु की गलियों में फंसी, बन्द कर पाँखें पी रही हैं मधु मौन अथवा सोई कमल-कोरकों में? बन्द हो रहा गुंजार जागो फिर एक बार! अस्ताचल चले रवि, शशि-छवि विभावरी में चित्रित हुई है देख यामिनीगन्धा जगी. एकटक चकोर-कोर दर्शन-प्रिय, आशाओं भरी मौन भाषा बहु भावमयी घेर रहा चन्द्र को चाव से शिशिर-भार-व्याकुल कुल खुले फूल झुके हुए, आया कलियों में मधुर मद-उर-यौवन उभार जागो फिर एक बार! इस कविता में कवि किसे जगाने का प्रयत्न कर रहे हैं?