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ईलाईची खाने के अनेक फ़ायदे#helth #shorts...

ईलाईची खाने के अनेक फ़ायदे#helth #shorts

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पुष्पी पादप में लैंगिक जनन-पुष्प संरचना |पराग़कण के नुक़सान और फ़ायदे |स्त्रीकेसर |परागण और उसके प्रकार ,प्रकार के लाभ हानि सहित |कृत्रिम संकरीकरण |पराग़ -स्त्रीकेसर संकर्षण |भ्रूणपोष |बीज और (फल के प्रकार)

Slope Of Line (सीधी रेखा का ढाल)|Angle Between Two Lines (दो रेखाओं के बीच का कोण)|Equation Of Line (रेखा का समीकरण)|Concept Of Line (रेखा की अवधारणा)|Distance Between Two Parallel Lines (दो समांतर रेखाओ के बीच की दूरी)|Distance Of A Point From A Lines (दो रेखा से एक बिन्दु की दूरी)|Some Short Tricks (आसान तरीके)|Questions (प्रश्न)|OMR

आज छात्रों की उपलब्धियों का मापन करने के लिए अनेक विधियों का प्रयोग किया जाता है। निम्न में से कौन सी मापन की विधि नहीं है

If a dining table with marked price Rs.6,000 was sold to a customer for Rs.5,520, then the rate of discount allowed on the marked price of the table is: यदि अंकित मूल्य 6,000 रुपये की खाने की मेज़ ग्राहक को 5,520 रुपये में बेची जाती है, तो मेज़ के अंकित मूल्य पर छूट की दर है:

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। भारत की विभिन्नता विशाल है अर्थात भारत विभिन्नतापूर्ण देश है। यह स्पष्ट है, यह सबके सामने है और कोई भी व्यक्ति इसे देख सकता है। इसका सम्बन्ध बाहरी आकृति तथा कुछ निश्चित मानसिक प्रवृत्तियों एवं विशेष गुणों से है। बाह्य रूप से उत्तर-पश्चिम के पठान तथा सुदूर दक्षिण के तमिलों में बिल्कुल भी समानता नहीं है। उनकी नस्लें भी एक नहीं हैं। यद्यपि उनमें कुछ सामान्य गुण एक से हो सकते हैं, वे चहरे और शक्ल में, खानपान और कपड़ों में तथा स्वाभाविक रूप से भाषा में एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न हैं। उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रान्त में मध्य एशिया का प्रभाव पहले से ही है, कश्मीर के समान ही उनके अनेक रीति-रिवाज हमें हिमालय के दूसरी ओर स्थित देशों की याद दिलाते हैं। पठानों के लोकप्रिय नाच रूस के कज्जाक लोगों के नाचों से विचित्र रूप से समान हैं। फिर भी इन अन्तरों के होने पर भी पठानों पर भारत की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है यही बात तमिलों के विषय में भी है। अर्थात पठानों और तमिलों पर भारतीयता की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि ये सीमा प्रान्तीय प्रदेश और अफगानिस्तान हजारों वर्षों से भारत के साथ जुड़े हुए हैं। प्राचीन काल के तुर्क और दूसरी जातियाँ जो मध्य एशिया के अन्य भागों में रहा करती थीं, इस्लाम धर्म के प्रसार से पहले अधिकांश रूप से बौद्ध धर्म को मानने वाली थीं और उससे भी पहले महाकाव्य युग में हिन्दू धर्म को मानती थीं। सीमा प्रान्त का प्रदेश प्राचीन भारतीय संस्कृति का केन्द्र था और अब भी इस प्रदेश में स्मारकों तथा मठों के खंडहर भरे पड़े हैं और विशेष रूप से गहन विश्वविद्यालय तक्षशिला के खंडहर पाये जाते हैं जो अब से 2000 वर्ष पूर्व अपनी प्रसिद्धि की चरम सीमा पर था अर्थात बहुत प्रसिद्ध था। इस विश्वविद्यालय में भारत के प्रत्येक भाग से तथा रशिया के विभिन्न भागों से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के लिए आया करते थे। धर्म के परिवर्तन ने अंतर तो डाला किन्तु मानसिक पृष्ठभूमि को पूर्ण रूप से नहीं बदल सका जिसका विकास उन क्षेत्रों के लोगों ने किया था। विभिन्नता पूर्ण देश कौन-सा है?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। भारत की विभिन्नता विशाल है अर्थात भारत विभिन्नतापूर्ण देश है। यह स्पष्ट है, यह सबके सामने है और कोई भी व्यक्ति इसे देख सकता है। इसका सम्बन्ध बाहरी आकृति तथा कुछ निश्चित मानसिक प्रवृत्तियों एवं विशेष गुणों से है। बाह्य रूप से उत्तर-पश्चिम के पठान तथा सुदूर दक्षिण के तमिलों में बिल्कुल भी समानता नहीं है। उनकी नस्लें भी एक नहीं हैं। यद्यपि उनमें कुछ सामान्य गुण एक से हो सकते हैं, वे चहरे और शक्ल में, खानपान और कपड़ों में तथा स्वाभाविक रूप से भाषा में एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न हैं। उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रान्त में मध्य एशिया का प्रभाव पहले से ही है, कश्मीर के समान ही उनके अनेक रीति-रिवाज हमें हिमालय के दूसरी ओर स्थित देशों की याद दिलाते हैं। पठानों के लोकप्रिय नाच रूस के कज्जाक लोगों के नाचों से विचित्र रूप से समान हैं। फिर भी इन अन्तरों के होने पर भी पठानों पर भारत की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है यही बात तमिलों के विषय में भी है। अर्थात पठानों और तमिलों पर भारतीयता की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि ये सीमा प्रान्तीय प्रदेश और अफगानिस्तान हजारों वर्षों से भारत के साथ जुड़े हुए हैं। प्राचीन काल के तुर्क और दूसरी जातियाँ जो मध्य एशिया के अन्य भागों में रहा करती थीं, इस्लाम धर्म के प्रसार से पहले अधिकांश रूप से बौद्ध धर्म को मानने वाली थीं और उससे भी पहले महाकाव्य युग में हिन्दू धर्म को मानती थीं। सीमा प्रान्त का प्रदेश प्राचीन भारतीय संस्कृति का केन्द्र था और अब भी इस प्रदेश में स्मारकों तथा मठों के खंडहर भरे पड़े हैं और विशेष रूप से गहन विश्वविद्यालय तक्षशिला के खंडहर पाये जाते हैं जो अब से 2000 वर्ष पूर्व अपनी प्रसिद्धि की चरम सीमा पर था अर्थात बहुत प्रसिद्ध था। इस विश्वविद्यालय में भारत के प्रत्येक भाग से तथा रशिया के विभिन्न भागों से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के लिए आया करते थे। धर्म के परिवर्तन ने अंतर तो डाला किन्तु मानसिक पृष्ठभूमि को पूर्ण रूप से नहीं बदल सका जिसका विकास उन क्षेत्रों के लोगों ने किया था। पठानों का लोकप्रिय नाच कहाँ के लोगों के नाच के समान है?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। भारत की विभिन्नता विशाल है अर्थात भारत विभिन्नतापूर्ण देश है। यह स्पष्ट है, यह सबके सामने है और कोई भी व्यक्ति इसे देख सकता है। इसका सम्बन्ध बाहरी आकृति तथा कुछ निश्चित मानसिक प्रवृत्तियों एवं विशेष गुणों से है। बाह्य रूप से उत्तर-पश्चिम के पठान तथा सुदूर दक्षिण के तमिलों में बिल्कुल भी समानता नहीं है। उनकी नस्लें भी एक नहीं हैं। यद्यपि उनमें कुछ सामान्य गुण एक से हो सकते हैं, वे चहरे और शक्ल में, खानपान और कपड़ों में तथा स्वाभाविक रूप से भाषा में एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न हैं। उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रान्त में मध्य एशिया का प्रभाव पहले से ही है, कश्मीर के समान ही उनके अनेक रीति-रिवाज हमें हिमालय के दूसरी ओर स्थित देशों की याद दिलाते हैं। पठानों के लोकप्रिय नाच रूस के कज्जाक लोगों के नाचों से विचित्र रूप से समान हैं। फिर भी इन अन्तरों के होने पर भी पठानों पर भारत की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है यही बात तमिलों के विषय में भी है। अर्थात पठानों और तमिलों पर भारतीयता की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि ये सीमा प्रान्तीय प्रदेश और अफगानिस्तान हजारों वर्षों से भारत के साथ जुड़े हुए हैं। प्राचीन काल के तुर्क और दूसरी जातियाँ जो मध्य एशिया के अन्य भागों में रहा करती थीं, इस्लाम धर्म के प्रसार से पहले अधिकांश रूप से बौद्ध धर्म को मानने वाली थीं और उससे भी पहले महाकाव्य युग में हिन्दू धर्म को मानती थीं। सीमा प्रान्त का प्रदेश प्राचीन भारतीय संस्कृति का केन्द्र था और अब भी इस प्रदेश में स्मारकों तथा मठों के खंडहर भरे पड़े हैं और विशेष रूप से गहन विश्वविद्यालय तक्षशिला के खंडहर पाये जाते हैं जो अब से 2000 वर्ष पूर्व अपनी प्रसिद्धि की चरम सीमा पर था अर्थात बहुत प्रसिद्ध था। इस विश्वविद्यालय में भारत के प्रत्येक भाग से तथा रशिया के विभिन्न भागों से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के लिए आया करते थे। धर्म के परिवर्तन ने अंतर तो डाला किन्तु मानसिक पृष्ठभूमि को पूर्ण रूप से नहीं बदल सका जिसका विकास उन क्षेत्रों के लोगों ने किया था। प्राचीन काल के तुर्क इस्लाम धर्म के पहले कौन-से धर्म को मानते थे?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। भारत की विभिन्नता विशाल है अर्थात भारत विभिन्नतापूर्ण देश है। यह स्पष्ट है, यह सबके सामने है और कोई भी व्यक्ति इसे देख सकता है। इसका सम्बन्ध बाहरी आकृति तथा कुछ निश्चित मानसिक प्रवृत्तियों एवं विशेष गुणों से है। बाह्य रूप से उत्तर-पश्चिम के पठान तथा सुदूर दक्षिण के तमिलों में बिल्कुल भी समानता नहीं है। उनकी नस्लें भी एक नहीं हैं। यद्यपि उनमें कुछ सामान्य गुण एक से हो सकते हैं, वे चहरे और शक्ल में, खानपान और कपड़ों में तथा स्वाभाविक रूप से भाषा में एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न हैं। उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रान्त में मध्य एशिया का प्रभाव पहले से ही है, कश्मीर के समान ही उनके अनेक रीति-रिवाज हमें हिमालय के दूसरी ओर स्थित देशों की याद दिलाते हैं। पठानों के लोकप्रिय नाच रूस के कज्जाक लोगों के नाचों से विचित्र रूप से समान हैं। फिर भी इन अन्तरों के होने पर भी पठानों पर भारत की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है यही बात तमिलों के विषय में भी है। अर्थात पठानों और तमिलों पर भारतीयता की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि ये सीमा प्रान्तीय प्रदेश और अफगानिस्तान हजारों वर्षों से भारत के साथ जुड़े हुए हैं। प्राचीन काल के तुर्क और दूसरी जातियाँ जो मध्य एशिया के अन्य भागों में रहा करती थीं, इस्लाम धर्म के प्रसार से पहले अधिकांश रूप से बौद्ध धर्म को मानने वाली थीं और उससे भी पहले महाकाव्य युग में हिन्दू धर्म को मानती थीं। सीमा प्रान्त का प्रदेश प्राचीन भारतीय संस्कृति का केन्द्र था और अब भी इस प्रदेश में स्मारकों तथा मठों के खंडहर भरे पड़े हैं और विशेष रूप से गहन विश्वविद्यालय तक्षशिला के खंडहर पाये जाते हैं जो अब से 2000 वर्ष पूर्व अपनी प्रसिद्धि की चरम सीमा पर था अर्थात बहुत प्रसिद्ध था। इस विश्वविद्यालय में भारत के प्रत्येक भाग से तथा रशिया के विभिन्न भागों से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के लिए आया करते थे। धर्म के परिवर्तन ने अंतर तो डाला किन्तु मानसिक पृष्ठभूमि को पूर्ण रूप से नहीं बदल सका जिसका विकास उन क्षेत्रों के लोगों ने किया था। प्रस्तुत गद्यांश में कहाँ के लोगों में समानता नहीं है?