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SAMSUNG ने बना डाला दुनियां का सबसे अनोखा tv ? #shorts

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बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में न जैसे-जैसे धान रोप दिया गया था लेकिन तेज धूप ने उसे झुलसा ।। डाला था। सावन सिर पर था और बादल लापता कि तभी, एक नि उमसती हुई रात में बिजली कड़कने से नींद खुली। थोड़ी देर में वि झींसियाँ पड़ने लगी। चारपाइयाँ आंगन से उठाकर भीतर कर ली गईं। लेकिन हवा गुम थी और गर्मी ज्यों-की-त्यो लिहाजा वह रातः स्तजगे में ही गई। सुबह हुई तो लोग धान बच-जाने को लेकर ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते दिखे। बरसात रात वाली रफ्तार से ही ... उर जारी थी। न उससे धीमी, न तेजा आसमान समतल और तकरीबना र सफेद था। बादल बीच-बीच में जरा-सा गुर्राकर खिामोश हो जा रहे। थे। स्कूल का टाइम' हुआ तो हमे जैसे ढीलों ने इकतरफा तौर पर 'रेनी डे' मानाने का फैसला किया, जबकि पढ़ाकुओं ने बस्ता लादा और सुपरिचित रास्ते पर बढ़ चले। थके-हारे पढवैये शाम को लौटे तो उनकी हालत कटे खेत में पानी भरने पर भागे चूहों जैसी थी। बा बारिश से बुरी तरह ऊबकर हम सोए, इस उम्मीद में कि कल नीला आकाश देखने को मिलेगा! ''हम जैसे ढीलों ने इकतरफा तौर पर रेनी डे' मनाने का फैसला किया।" वाक्य में लेखक ने अपनी किस विशेषता को बताया है?

निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में जैसे-जैसे धान रोप दिया गया था लेकिन तेज धूप ने उसे झुलसा डाला था। सावन सिर पर था और बादल लापता कि तभी एक उमसती हुई रात में बिजली कड़कने से नींद खली। थोड़ी देर में झींसियाँ पड़ने लगी। चारपाइयाँ आंगन से उठाकर भीतर कर ली गईं। लेकिन हवा गुम थी और गर्मी ज्यों-की-त्यो, लिहाजा वह रात रतजगे में ही गई। सुबह हुई तो लोग धान बच जाने को लेकर ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते दिखे। बरसात रात वाली रफ्तार से ही जारी थी। न उससे धीमी, न तेज। आसमान समतल और तकरीबन सफेद था। बादल बीच-बीच में जरा-सा गुर्राकर खामोश हो जा रहे थे। स्कूल का टाइम हुआ तो हम जैसे ढीलों ने इकतरफा तौर पर 'रेनी डे' मानाने का फैसला किया, जबकि पढ़ाकुओं ने बस्ता लादा और सुपरिचित रास्ते पर बढ़ चले। थके-हारे पढ़वैये शाम को लौटे तो उनकी हालत कटे खेत में पानी भरने पर भागे चूहों जैसी थी। बारिश से बुरी तरह ऊबकर हम सोए, इस उम्मीद में कि कल नीला आकाश देखने को मिलेगा| "हम जैसे ढ़ीलों ने इकतरफा तौर पर 'रेनी डे' मनाने का फैसला किया।" वाक्य में लेखक ने अपनी किस विशेषता को बताया है ?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भाँति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह स्मरण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप नहीं कर सकता है। किंतु कुछ लोग अंधकार को स्वीकार करने से बचने के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत् उपक्रम बन जाता है। लेखक ने किसे सबसे बड़ा पाप कहा है?

निर्देश: गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह समर्पण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप नहीं कर सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत् उपक्रम बन जाता है। लेखक ने किसे सबसे बड़ा पाप कहा है?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह स्मरण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप नहीं कर सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत उपक्रम बन जाता है। लेखक ने किसे सबसे बड़ा पाप कहा है?

निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में जैसे-जैसे धान रोप दिया गया था लेकिन तेज धूप ने उसे झुलसा डाला था। सावन सिर पर था और बादल लापता कि तभी एक उमसती हुई रात में बिजली कड़कने से नींद खली। थोड़ी देर में झींसियाँ पड़ने लगी। चारपाइयाँ आंगन से उठाकर भीतर कर ली गईं। लेकिन हवा गुम थी और गर्मी ज्यों-की-त्यो, लिहाजा वह रात रतजगे में ही गई। सुबह हुई तो लोग धान बच जाने को लेकर ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते दिखे। बरसात रात वाली रफ्तार से ही जारी थी। न उससे धीमी, न तेज। आसमान समतल और तकरीबन सफेद था। बादल बीच-बीच में जरा-सा गुर्राकर खामोश हो जा रहे थे। स्कूल का टाइम हुआ तो हम जैसे ढीलों ने इकतरफा तौर पर 'रेनी डे' मानाने का फैसला किया, जबकि पढ़ाकुओं ने बस्ता लादा और सुपरिचित रास्ते पर बढ़ चले। थके-हारे पढ़वैये शाम को लौटे तो उनकी हालत कटे खेत में पानी भरने पर भागे चूहों जैसी थी। बारिश से बुरी तरह ऊबकर हम सोए, इस उम्मीद में कि कल नीला आकाश देखने को मिलेगा| किन लोगों ने 'रेनी डे' नहीं मनाया ?

निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में जैसे-जैसे धान रोप दिया गया था लेकिन तेज धूप ने उसे झुलसा डाला था। सावन सिर पर था और बादल लापता कि तभी एक उमसती हुई रात में बिजली कड़कने से नींद खली। थोड़ी देर में झींसियाँ पड़ने लगी। चारपाइयाँ आंगन से उठाकर भीतर कर ली गईं। लेकिन हवा गुम थी और गर्मी ज्यों-की-त्यो, लिहाजा वह रात रतजगे में ही गई। सुबह हुई तो लोग धान बच जाने को लेकर ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते दिखे। बरसात रात वाली रफ्तार से ही जारी थी। न उससे धीमी, न तेज। आसमान समतल और तकरीबन सफेद था। बादल बीच-बीच में जरा-सा गुर्राकर खामोश हो जा रहे थे। स्कूल का टाइम हुआ तो हम जैसे ढीलों ने इकतरफा तौर पर 'रेनी डे' मानाने का फैसला किया, जबकि पढ़ाकुओं ने बस्ता लादा और सुपरिचित रास्ते पर बढ़ चले। थके-हारे पढ़वैये शाम को लौटे तो उनकी हालत कटे खेत में पानी भरने पर भागे चूहों जैसी थी। बारिश से बुरी तरह ऊबकर हम सोए, इस उम्मीद में कि कल नीला आकाश देखने को मिलेगा| "सावन सिर पर था।" इस कथन का आशय है कि सावनः

निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में जैसे-जैसे धान रोप दिया गया था लेकिन तेज धूप ने उसे झुलसा डाला था। सावन सिर पर था और बादल लापता कि तभी एक उमसती हुई रात में बिजली कड़कने से नींद खली। थोड़ी देर में झींसियाँ पड़ने लगी। चारपाइयाँ आंगन से उठाकर भीतर कर ली गईं। लेकिन हवा गुम थी और गर्मी ज्यों-की-त्यो, लिहाजा वह रात रतजगे में ही गई। सुबह हुई तो लोग धान बच जाने को लेकर ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते दिखे। बरसात रात वाली रफ्तार से ही जारी थी। न उससे धीमी, न तेज। आसमान समतल और तकरीबन सफेद था। बादल बीच-बीच में जरा-सा गुर्राकर खामोश हो जा रहे थे। स्कूल का टाइम हुआ तो हम जैसे ढीलों ने इकतरफा तौर पर 'रेनी डे' मानाने का फैसला किया, जबकि पढ़ाकुओं ने बस्ता लादा और सुपरिचित रास्ते पर बढ़ चले। थके-हारे पढ़वैये शाम को लौटे तो उनकी हालत कटे खेत में पानी भरने पर भागे चूहों जैसी थी। बारिश से बुरी तरह ऊबकर हम सोए, इस उम्मीद में कि कल नीला आकाश देखने को मिलेगा| "बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था।" वाक्य का भाव है: