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जब किसानो ने बना लिया दूध को हथियार #fac...

जब किसानो ने बना लिया दूध को हथियार #facts #shorts

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निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये-- यज्ञ की अग्नि प्रज्वलित थी। वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ घी और सामग्री की आहुतियाँ उसमें पड़ रही थी। सारे वातावरण में सुधि व्याप्त थी और वाजश्रव के चेहरे पर विशेष प्रसन्नता झलक रही थी। उसके द्वारा आयोजित यज्ञ की आज पुर्णाहुति जो थी। देश भर में बड़े-बड़े विद्वान और ऋषि मुनि पधारे थे। यज्ञ के उपरांत वाजश्रवा ब्राह्मणों को प्रभूत दक्षिणा देगा, ऐसा सभी सोच रहे थे। यज्ञ समाप्त हुआ। ब्राह्मणों ने बाजश्रवा को आशीर्वाद दिया और वाजश्रवा ने उन्हें दक्षिणा देना प्रारंभ किया। किंतु यह क्या। यज्ञ की इस अंतिम घड़ी में वाजश्रवा को किस मोह ने घेर लिया? कहाँ तो उसने निश्चय किया था कि यज्ञ की समाप्ति पर वह अपनी सारी संपति दान कर देगा और कहाँ दक्षिणा में दान देने लगा ऐसा निर्बल और बूढ़ी गाएँ जिन्होंने दूध देना ही बंद कर दियाथा। यह बात 'नचिकेता' को अच्छी नहीं लगी। वाजश्रव को किस मोह ने घेर लिया? रेखांकित भाग में प्रयुक्त कारक बताएँ

Twenty teams take part in a football tournament. Each team has to play every other team. How many games would be played in the tournament? एक फुटबॉल प्रतियोगिता में बीस टीमों ने भाग लिया | प्रत्येक टीम को हर दूसरी टीम से खेलना है | इस प्रतियोगिता में कितने मैच खेले जायेंगे ?

कुछ लाख वर्ष पहले की बात है जब मनुष्य जंगली था, वनमानुष जैसा उसे नाख़ून की जरुरत थी उसकी जीवन रक्षा के लिए नाख़ून बहुत ज़रूरी थे असल में वही उसके अस्त्र थे दाँत भी थे पर नाख़ून के बाद ही उनका स्थान था उन दिनों उसे झूझना पड़ता था प्रतिद्वन्दियो को पछाड़ना पड़ता था नाख़ून उसके लिए आवश्यक अंग था फिर वह अपने अंग से बाहर की वस्तुओ का सहारा लेने लग। पत्थर के ढेले और पेड़ की डाले काम में लाने लगा (रामचन्द्रजी की वानरी सेना के पास ऐसे ही अस्त्र थे) ! उसने हड्डियों के भी हथियार बनाये! इन हड्डी के हथियार में सबसे मजबूत और सब से ऐतिहासिक था इन्द्र देव का वज्र, जो ऋषि मुनि की हड्डियों से बना था मनुष्य और आगे बढ़ा उसने धातु के हथियार बनाये जिनके पास लोहे के अस्त्र और शस्त्र थे वे विजयी हुए। देवताओ के राजा तक को मनुष्ये के राजा से इसलिए सहायता लेनी पड़ती थी क्यूंकि मनुष्ये के राजा के पास लोहे के अस्त्र थे असुरो के पास अनेक विधाये थी पर लोहे के अस्त्र नहीं थे शायद घोड़े भी नहीं थे आर्यो के पास यह दोनों चीज़े थी आर्ये विजयी हुए फिर इतिहास अपनी गति से बढ़ता गया नाग हारे सुपर्ण हारे यक्ष हारे गन्धर्व हारे असुरे हारे राक्षस हारे लोहे के अस्त्रों ने बाज़ी मार ली इतिहास आगे बढ़ा। पलीते वाली बंदूकों ने, कारतूसों ने, तोपों ने , बमो ने , बम वर्षक वायुयानों ने इतिहास को किस कीचड़ भरे घाट तक घसीटा है यह सबको मालूम है नख धर मनुष्य अब भी बढ़ रहे है अब भी प्रकृति भी मनुष्यो को उसके भीतर वाले अस्त्र से वंचित नहीं कर रही है , अब भी याद दिला देती है के तुम्हारे नाख़ून को भुलाया नहीं जा सकता। तुम वही लाख वर्ष पहले के नख - दंतावलम्वी जीव हो-पशु के साथ ही सतह पर विचरने वाले और चरने वाले। प्राचीन काल में मनुष्य को नाख़ून की आवश्यकता क्यों थी