Jeff Bezos करेंगे अंतरिक्ष की सैर #shorts
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Jeff Bezos is the CEO of:
Comprehension: In the following passage some words have been deleted. Fill in the blanks with the help of the alternatives given. Select the most appropriate option for each blank. Bill Gates is the second-richest (1) ______ in the world. He is (2) ______ an estimated $ 103 billion. His wealth (3) ______ only by Jeff Bezos, (4) ______ has a current net worth of $ 116 billion. Gates is (5) ______ rich that an average American spending $ 1 is similar to Gates spending $ 1.06 million. Select the most appropriate option for blank No. 3.
Comprehension: In the following passage some words have been deleted. Fill in the blanks with the help of the alternatives given. Select the most appropriate option for each blank. Bill Gates is the second-richest (1) ______ in the world. He is (2) ______ an estimated $ 103 billion. His wealth (3) ______ only by Jeff Bezos, (4) ______ has a current net worth of $ 116 billion. Gates is (5) ______ rich that an average American spending $ 1 is similar to Gates spending $ 1.06 million. Select the most appropriate option for blank No. 4.
Comprehension: In the following passage some words have been deleted. Fill in the blanks with the help of the alternatives given. Select the most appropriate option for each blank. Bill Gates is the second-richest (1) ______ in the world. He is (2) ______ an estimated $ 103 billion. His wealth (3) ______ only by Jeff Bezos, (4) ______ has a current net worth of $ 116 billion. Gates is (5) ______ rich that an average American spending $ 1 is similar to Gates spending $ 1.06 million. Select the most appropriate option for blank No. 5.
Slope Of Line (सीधी रेखा का ढाल)|Angle Between Two Lines (दो रेखाओं के बीच का कोण)|Equation Of Line (रेखा का समीकरण)|Concept Of Line (रेखा की अवधारणा)|Distance Between Two Parallel Lines (दो समांतर रेखाओ के बीच की दूरी)|Distance Of A Point From A Lines (दो रेखा से एक बिन्दु की दूरी)|Some Short Tricks (आसान तरीके)|Questions (प्रश्न)|OMR
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हैरानी की बात यह है कि मेरी दलील मित्रों के हलक से नहीं उतरती थी, तब मैं उनसे कहता था- 'साहित्य की हर विधा को हर तरह की लेखनी को मैं बतौर चुनौती स्वीकार करता हूँ। आम आदमी से लेकर खास आदमी तक के हृदय को छूना कोई मामूली बात नहीं होती। यह तो आप भी स्वीकार करेंगे, क्योंकि यह काम सिर्फ रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ ही कर पाते हैं।' मेरी यह दलील रामबाण सिद्ध होती थी, वे सारे मित्र सोच में पड़ जाते थे, क्योंकि वे केवल किसी भी एक वर्ग के लिख पाते थे- 'मास' के लिए 'क्लास' के लिए। उनके दायरे सौमित थे। लेकिन मैं दायरों के बाहर का शख्स हूँ। शायद इसी कारण मैं आपसे खुलकर अंतरंग बातें भी कर सकता हूँ। बात कहानी की रचना-प्रक्रिया से आरंभ की थी। तब मैं 'ओ.हेनरी' की एक कहानी पढ़ता था और भीतर दो नई कहानियों के बीज अपने आप पड़ जाते थे। न कोई मशक्कत, न कोई गहरी सोच। यह प्रोसेस मेरे लिए उतना ही आसान था जितना कि कैरम का खेल। फिर भी ये रचनाएँ कहानी के शिल्प में कहानी विधा के अंतर्गत लिखी गई पुख्ता किस्सागोई हैं। पर यह किस्सागोई जिंदगी से अलग नहीं हो सकती। लेखक के लेखन की क्या खास बात है?
हैरानी की बात यह है कि मेरी दलील मित्रों के हलक से नहीं उतरती थी, तब मैं उनसे कहता था-'साहित्य की हर विधा को, हर तरह की लेखनी को मैं बतौर चुनौती स्वीकार करता हूँ। आम आदमी से लेकर खास आदमी तक के हृदय को छूना कोई मामूली बात नहीं होती। यह तो आप भी स्वीकार करेंगे, क्योंकि यह काम सिर्फ रामायण और महाभारत जैसे ग्रन्थ ही कर पाते है। मेरी यह दलील रामबाण सिद्ध होती थी, वे सारे मित्र सोच में पड़ जाते थे, क्योंकि वे केवल किसी भी एक वर्ग के लिए लिख पाते थे- 'मास' के लिए या 'क्लास' के लिए। उनके दायरे सीमित थे लेकिन मैं दायरों के बाहर का शख्स हूँ। शायद इसी कारण मैं आपसे खुलकर अन्तरंग बातें भी कर सकता हूँ। बात कहानी की रचना-प्रक्रिया से आरम्भ की थी। तब मैं 'ओ. हेनरी' की एक कहानी पढ़ता था और भीतर दो नई कहानियों के बीज अपने आप पड़ जाते थे। न कोई मशक्कत, न कोई गहरी सोचा यह प्रोसेस मेरे लिए उतना ही आसान था जितना कि कैरम का खेल। फिर भी ये रचनाएँ कहानी के शिल्प में कहानी विधा के अन्तर्गत लिखी गई पुख्ता किस्सागोई हैं। पर यह किस्सागोई जिन्दगी से अलग नहीं हो सकती। लेखक के लेखन की क्या खास बात है?
हैरानी की बात यह है कि मेरी दलील मित्रों के हलक से नहीं उतरती थी, तब मैं उनसे कहता था-'साहित्य की हर विधा को, हर तरह की लेखनी को मैं बतौर चुनौती स्वीकार करता हूँ। आम आदमी से लेकर खास आदमी तक के हृदय को छूना कोई मामूली बात नहीं होती। यह तो आप भी स्वीकार करेंगे, क्योंकि यह काम सिर्फ रामायण और महाभारत जैसे ग्रन्थ ही कर पाते है। मेरी यह दलील रामबाण सिद्ध होती थी, वे सारे मित्र सोच में पड़ जाते थे, क्योंकि वे केवल किसी भी एक वर्ग के लिए लिख पाते थे- 'मास' के लिए या 'क्लास' के लिए। उनके दायरे सीमित थे लेकिन मैं दायरों के बाहर का शख्स हूँ। शायद इसी कारण मैं आपसे खुलकर अन्तरंग बातें भी कर सकता हूँ। बात कहानी की रचना-प्रक्रिया से आरम्भ की थी। तब मैं 'ओ. हेनरी' की एक कहानी पढ़ता था और भीतर दो नई कहानियों के बीज अपने आप पड़ जाते थे। न कोई मशक्कत, न कोई गहरी सोचा यह प्रोसेस मेरे लिए उतना ही आसान था जितना कि कैरम का खेल। फिर भी ये रचनाएँ कहानी के शिल्प में कहानी विधा के अन्तर्गत लिखी गई पुख्ता किस्सागोई हैं। पर यह किस्सागोई जिन्दगी से अलग नहीं हो सकती। लेखक को कहानी लिखने में