ये पक्षी तो अलग ही लेवल की निकली | Amazing Facts In Hindi | #shorts #ytshorts #facts
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The different positions of the same dice are shown. How many dots will be on the top if four dots are at the bottom? एक ही पासे की तीन अलग-अलग अवस्थाएं दी गयी हैं | यदि तल पर चार बिंदु हैं, तो शीर्ष पर कितने बिंदु होंगे ?
The table shows the production of different types of cars (in thousands) यह तालिका अलग-अलग प्रकार के कारों का उत्पादन ( हज़ार में ) दर्शाती है | The production of cars of type A in 2015 and of type C in 2013 taken together is approximately what percent of the total production of cars of type D in five years? 2015 में A प्रकार की कारों का उत्पादन तथा 2013 में C प्रकार की कारों के उत्पादन को मिला दिया जाए, तो ये पांच वर्षों में D प्रकार की कारों के कुल उत्पादन का लगभग कितना प्रतिशत है ?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। सोनजुही में आज एक पीली कली निकली है। उसे देखकर अनायास ही उस छोटे जीव का स्मरण हो आया, जो इस लता की सधन हरीतिमा में छिपकर बैठता था और फिर मेरे निकट पहुँचते ही कन्धे पर कूदकर मुझे चौका देता था। तब मुझे कली की खोज रहती थी, पर आज उस लघुप्राणी की खोज है। परंतु वह तो अब तक इस सोमजुही की जड़ में मिट्टी होकर मिल गया होगा कौन जाने स्वर्णिम कली के बहाने वही मुझे चौंकाने ऊपर आ गया हो। अचानक एक दिन सबेरे कमरे से बरामदे में आकर मैंने देखा, दो कौए एक गमले के चारों ओर चोंचों से छुवा-छुवौवलजैसा खेल खेल रहे हैं। यह काकभुशुडि भी विचित्र पक्षी है, एक साथ समादरित, अनादरित, अति सम्मानित, अति अवमानित। हमारे बेचारे पुरखे न गरुड़ के रूप में आ सकते हैं, न मयूर के, न हंस के उन्हें पितरपक्ष में हमसे कुछ पाने के लिए काक बनकर ही अवतीर्ण होना पड़ता है। इतना ही नहीं, हमारे दूरस्थ प्रियजनों को भी अपने आने का मधु सन्देश इनके कर्कश स्वर ही में दे देना पड़ता है। दूसरी ओर हम कौआ और कांव-काव करने को अवमानना के अर्थ में ही प्रयुक्त करते हैं। मेरे काकपुराण के विवेचन में अचानक बाधा आ पड़ी क्योंकि गमले और दीवार की सन्धि में छिपे एक छोटे से जीव पर मेरी दृष्टि रुक गयी। छुवा-छुवौवल जैसा खेल कौन खेल रहा था?
Three different positions of the same dice, which have one to six dots on its six faces, are shown below. When one dot is at the bottom the number of dots on the top will be: एक ही पासे की तीन अलग-अलग अवस्थाएं दी गयी है, जिनके छः फलकों पर एक से छः तक बिंदु स्थित स्थित हैं | जब तल पर एक बिंदु है, तो शीर्ष पर बिंदु होंगे ?
Three different positions of the same dice, which has one to six dots on its faces, are shown below. When six dots are at the bottom then the number of dots on the top will be: एक ही पासे की तीन अलग-अलग अवस्थाएं दी गयी है, जिनके छः फलकों पर एक से छः तक बिंदु स्थित हैं |जब तल पर छ: बिंदु हैं, तो शीर्ष पर कितने बिंदु होंगे ?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में से सबसे उचित विकल्प चुनिए। यायावरी यात्राओं के सुखो में एक सुख तो यह है की निकले किसी चीज की खोज में और मिल जाए कोई दूसरी ही चीज। लेकिन जीवन - भर यायावरी करते रहकर भी उस कल्पनातीत आविष्कार के लिए में तैयार नहीं था। जो इस बार राम - जानकी यात्रा के दौरान अकस्मात हुआ। यह तो जानता था की रामायण के चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ , उनके ऐसे अवशेष तो क्या ही मिल सकते है जिन्हे 'ऐतिहासिक' कहा जाए और यह भी जानता था की रामायण क चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ उनके ऐसे बहुत से स्थल मिल जायेंगे जिनका रामायण से कोई वास्तविक सम्बन्ध जरूर रहा हो , लेकिन उन्हें देखकर एकाएक यह मानने को जी होने लगे की कुछ सम्बन्ध जरूर रहा होगा। खासकर नेपाल ट्राई के जंगलो और नदी -नालो -भरे प्रदेशमें से गुजरते हुए तो मन हो ऐसा हो गया था किसी भी स्थल से जुड़ी किसी असुर की , गन्धर्व की , अप्सरा की , किरात अथवा नागकन्या की गाथा सुनकर एकाएक यह प्रतिक्रिया न होती की यह सब मनगढ़ंत है , ऐसा वास्तव में हुआ नहीं होगा , केवल आदिम -मानव की कच्ची कल्पना ने ये किससे गड़े होंगे। निश्चय ही स्थलों का अपना जादू होता है। ठोस व्यावहारिक आदमी भी ऐसे स्थलों पर पहुंचकर पाता है की उसकी कल्पना चेत उठी है फिर उसे अपनी संस्कृति के पुराण की ही बाते क्यों , दूसरी संस्कृतियों के पुराण भी सच्चे जान पढ़ने लगते है उनके भी वन - देवता और लता -बलाएँ और नदी -अप्सराएं देखते -देखते उसके आगे रूप लेने लगती है। लेखक के अनुसार आदिमानव की कच्ची कल्पना ने किस प्रकार की कहानियों को जन्म दिया होगा ?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में से सबसे उचित विकल्प चुनिए। यायावरी यात्राओं के सुखो में एक सुख तो यह है की निकले किसी चीज की खोज में और मिल जाए कोई दूसरी ही चीज। लेकिन जीवन - भर यायावरी करते रहकर भी उस कल्पनातीत आविष्कार के लिए में तैयार नहीं था। जो इस बार राम - जानकी यात्रा के दौरान अकस्मात हुआ। यह तो जानता था की रामायण के चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ , उनके ऐसे अवशेष तो क्या ही मिल सकते है जिन्हे 'ऐतिहासिक' कहा जाए और यह भी जानता था की रामायण क चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ उनके ऐसे बहुत से स्थल मिल जायेंगे जिनका रामायण से कोई वास्तविक सम्बन्ध जरूर रहा हो , लेकिन उन्हें देखकर एकाएक यह मानने को जी होने लगे की कुछ सम्बन्ध जरूर रहा होगा। खासकर नेपाल ट्राई के जंगलो और नदी -नालो -भरे प्रदेशमें से गुजरते हुए तो मन हो ऐसा हो गया था किसी भी स्थल से जुड़ी किसी असुर की , गन्धर्व की , अप्सरा की , किरात अथवा नागकन्या की गाथा सुनकर एकाएक यह प्रतिक्रिया न होती की यह सब मनगढ़ंत है , ऐसा वास्तव में हुआ नहीं होगा , केवल आदिम -मानव की कच्ची कल्पना ने ये किसस गड़े होंगे। निश्चय ही स्थलों का अपना जादू होता है। ठोस व्यावहारिक आदमी भी ऐसे स्थलों पर पहुंचकर पाता है की उसकी कल्पना चेत उठी है फिर उसे अपनी संस्कृति के पुराण की ही बाते क्यों , दूसरी संस्कृतियों के पुराण भी सच्चे जान पढ़ने लगते है उनके भी वन - देवता और लता -बलाएँ और नदी -अप्सराएं देखते -देखते उसके आगे रूप लेने लगती है। रामायण -स्थलों की खोज पर जाने से पहले लेखक को क्या पता था ?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में से सबसे उचित विकल्प चुनिए। यायावरी यात्राओं के सुखो में एक सुख तो यह है की निकले किसी चीज की खोज में और मिल जाए कोई दूसरी ही चीज। लेकिन जीवन - भर यायावरी करते रहकर भी उस कल्पनातीत आविष्कार के लिए में तैयार नहीं था। जो इस बार राम - जानकी यात्रा के दौरान अकस्मात हुआ। यह तो जानता था की रामायण के चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ , उनके ऐसे अवशेष तो क्या ही मिल सकते है जिन्हे 'ऐतिहासिक' कहा जाए और यह भी जानता था की रामायण क चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ उनके ऐसे बहुत से स्थल मिल जायेंगे जिनका रामायण से कोई वास्तविक सम्बन्ध जरूर रहा हो , लेकिन उन्हें देखकर एकाएक यह मानने को जी होने लगे की कुछ सम्बन्ध जरूर रहा होगा। खासकर नेपाल ट्राई के जंगलो और नदी -नालो -भरे प्रदेशमें से गुजरते हुए तो मन हो ऐसा हो गया था किसी भी स्थल से जुड़ी किसी असुर की , गन्धर्व की , अप्सरा की , किरात अथवा नागकन्या की गाथा सुनकर एकाएक यह प्रतिक्रिया न होती की यह सब मनगढ़ंत है , ऐसा वास्तव में हुआ नहीं होगा , केवल आदिम -मानव की कच्ची कल्पना ने ये किसस गड़े होंगे। निश्चय ही स्थलों का अपना जादू होता है। ठोस व्यावहारिक आदमी भी ऐसे स्थलों पर पहुंचकर पाता है की उसकी कल्पना चेत उठी है फिर उसे अपनी संस्कृति के पुराण की ही बाते क्यों , दूसरी संस्कृतियों के पुराण भी सच्चे जान पढ़ने लगते है उनके भी वन - देवता और लता -बलाएँ और नदी -अप्सराएं देखते -देखते उसके आगे रूप लेने लगती है। 'यायावर' शब्द का पर्यायवाची नहीं है
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में से सबसे उचित विकल्प चुनिए। यायावरी यात्राओं के सुखो में एक सुख तो यह है की निकले किसी चीज की खोज में और मिल जाए कोई दूसरी ही चीज। लेकिन जीवन - भर यायावरी करते रहकर भी उस कल्पनातीत आविष्कार के लिए में तैयार नहीं था। जो इस बार राम - जानकी यात्रा के दौरान अकस्मात हुआ। यह तो जानता था की रामायण के चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ , उनके ऐसे अवशेष तो क्या ही मिल सकते है जिन्हे 'ऐतिहासिक' कहा जाए और यह भी जानता था की रामायण क चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ उनके ऐसे बहुत से स्थल मिल जायेंगे जिनका रामायण से कोई वास्तविक सम्बन्ध जरूर रहा हो , लेकिन उन्हें देखकर एकाएक यह मानने को जी होने लगे की कुछ सम्बन्ध जरूर रहा होगा। खासकर नेपाल ट्राई के जंगलो और नदी -नालो -भरे प्रदेशमें से गुजरते हुए तो मन हो ऐसा हो गया था किसी भी स्थल से जुड़ी किसी असुर की , गन्धर्व की , अप्सरा की , किरात अथवा नागकन्या की गाथा सुनकर एकाएक यह प्रतिक्रिया न होती की यह सब मनगढ़ंत है , ऐसा वास्तव में हुआ नहीं होगा , केवल आदिम -मानव की कच्ची कल्पना ने ये किससे गड़े होंगे। निश्चय ही स्थलों का अपना जादू होता है। ठोस व्यावहारिक आदमी भी ऐसे स्थलों पर पहुंचकर पाता है की उसकी कल्पना चेत उठी है फिर उसे अपनी संस्कृति के पुराण की ही बाते क्यों , दूसरी संस्कृतियों के पुराण भी सच्चे जान पढ़ने लगते है उनके भी वन - देवता और लता -बलाएँ और नदी -अप्सराएं देखते -देखते उसके आगे रूप लेने लगती है। नेपाल भ्रमण करते हुए लेखक ने क्या अनुभव किया ?
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- यदि y=sqrt(x^(2)+ax+1)" तो "(dy)/(dx) ज्ञात करें |
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- यदि y=cos (log x)," तो "(dy)/(dx)=
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- यदि y=x^(3)," तो "(d^(2)y)/(dx^(2))=
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- यदि veca=3veci+2vecj+veck,vecb=4veci-5vecj+3veck" तो "veca.vecb=
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