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दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 4 जो पूर्व में हमको अशिक्षित या असभ्य बता रहे वे लोग या तो अज्ञ हैं या पक्षपात जता रहे। यदि हम अशिक्षित थे, कहें तो सभ्य वे कैसे हुए? वे आप ऐसे भी नहीं थे, आज हम जैसे हुए। ज्यों-ज्यों हमारी प्रचुर प्राचीनता की खोज बढ़ती जाएगी त्यों-त्यों हमारी उच्चता पर आप चढ़ती जाएगी। जिस ओर देखेंगे हमारे चिह्न दर्शक पाएँगे हमको गया बतलाएँगे, जब, जो जहाँ तक जाएँगे। कल जो हमारी सभ्यता पर थे हँसे अज्ञान से वे आज लज्जित हो रहे हैं अधिक अनुसन्धान से। गिरते हुए भी दूसरों को हम चढ़ाते ही रहे घटते हुए भी दूसरों को हम बढ़ाते ही रहे। कौन लोग लज्जित हो रहे हैं?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 4 जो पूर्व में हमको अशिक्षित या असभ्य बता रहे वे लोग या तो अज्ञ हैं या पक्षपात जता रहे। यदि हम अशिक्षित थे, कहें तो सभ्य वे कैसे हुए? वे आप ऐसे भी नहीं थे, आज हम जैसे हुए। ज्यों-ज्यों हमारी प्रचुर प्राचीनता की खोज बढ़ती जाएगी त्यों-त्यों हमारी उच्चता पर आप चढ़ती जाएगी। जिस ओर देखेंगे हमारे चिह्न दर्शक पाएँगे हमको गया बतलाएँगे, जब, जो जहाँ तक जाएँगे। कल जो हमारी सभ्यता पर थे हँसे अज्ञान से वे आज लज्जित हो रहे हैं अधिक अनुसन्धान से। गिरते हुए भी दूसरों को हम चढ़ाते ही रहे घटते हुए भी दूसरों को हम बढ़ाते ही रहे। 'गिरते हुए भी दूसरों को हम चढ़ाते ही रहे' का आशय है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 4 जो पूर्व में हमको अशिक्षित या असभ्य बता रहे वे लोग या तो अज्ञ हैं या पक्षपात जता रहे। यदि हम अशिक्षित थे, कहें तो सभ्य वे कैसे हुए? वे आप ऐसे भी नहीं थे, आज हम जैसे हुए। ज्यों-ज्यों हमारी प्रचुर प्राचीनता की खोज बढ़ती जाएगी त्यों-त्यों हमारी उच्चता पर आप चढ़ती जाएगी। जिस ओर देखेंगे हमारे चिह्न दर्शक पाएँगे हमको गया बतलाएँगे, जब, जो जहाँ तक जाएँगे। कल जो हमारी सभ्यता पर थे हँसे अज्ञान से वे आज लज्जित हो रहे हैं अधिक अनुसन्धान से। गिरते हुए भी दूसरों को हम चढ़ाते ही रहे घटते हुए भी दूसरों को हम बढ़ाते ही रहे। उपरोक्त कविता का वक्ता कौन है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 4 जो पूर्व में हमको अशिक्षित या असभ्य बता रहे वे लोग या तो अज्ञ हैं या पक्षपात जता रहे। यदि हम अशिक्षित थे, कहें तो सभ्य वे कैसे हुए? वे आप ऐसे भी नहीं थे, आज हम जैसे हुए। ज्यों-ज्यों हमारी प्रचुर प्राचीनता की खोज बढ़ती जाएगी त्यों-त्यों हमारी उच्चता पर आप चढ़ती जाएगी। जिस ओर देखेंगे हमारे चिह्न दर्शक पाएँगे हमको गया बतलाएँगे, जब, जो जहाँ तक जाएँगे। कल जो हमारी सभ्यता पर थे हँसे अज्ञान से वे आज लज्जित हो रहे हैं अधिक अनुसन्धान से। गिरते हुए भी दूसरों को हम चढ़ाते ही रहे घटते हुए भी दूसरों को हम बढ़ाते ही रहे। कवि कहना चाहता है कि

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 4 जो पूर्व में हमको अशिक्षित या असभ्य बता रहे वे लोग या तो अज्ञ हैं या पक्षपात जता रहे। यदि हम अशिक्षित थे, कहें तो सभ्य वे कैसे हुए? वे आप ऐसे भी नहीं थे, आज हम जैसे हुए। ज्यों-ज्यों हमारी प्रचुर प्राचीनता की खोज बढ़ती जाएगी त्यों-त्यों हमारी उच्चता पर आप चढ़ती जाएगी। जिस ओर देखेंगे हमारे चिह्न दर्शक पाएँगे हमको गया बतलाएँगे, जब, जो जहाँ तक जाएँगे। कल जो हमारी सभ्यता पर थे हँसे अज्ञान से वे आज लज्जित हो रहे हैं अधिक अनुसन्धान से। गिरते हुए भी दूसरों को हम चढ़ाते ही रहे घटते हुए भी दूसरों को हम बढ़ाते ही रहे। जो शिक्षित न हो, उसे कहते है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 4 जो पूर्व में हमको अशिक्षित या असभ्य बता रहे वे लोग या तो अज्ञ हैं या पक्षपात जता रहे। यदि हम अशिक्षित थे, कहें तो सभ्य वे कैसे हुए? वे आप ऐसे भी नहीं थे, आज हम जैसे हुए। ज्यों-ज्यों हमारी प्रचुर प्राचीनता की खोज बढ़ती जाएगी त्यों-त्यों हमारी उच्चता पर आप चढ़ती जाएगी। जिस ओर देखेंगे हमारे चिह्न दर्शक पाएँगे हमको गया बतलाएँगे, जब, जो जहाँ तक जाएँगे। कल जो हमारी सभ्यता पर थे हँसे अज्ञान से वे आज लज्जित हो रहे हैं अधिक अनुसन्धान से। गिरते हुए भी दूसरों को हम चढ़ाते ही रहे घटते हुए भी दूसरों को हम बढ़ाते ही रहे। 'अज्ञ' का तात्पर्य है