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Exam से पहले ये पढ़ना है जरूरी...

Exam से पहले ये पढ़ना है जरूरी

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आखिरी 10 दिन ये करना है जरूरी ✅ Class 10 Last 10 Days Strategy

Five girls took part in a race. Rajni finished before Mahika but behind Garima. Ashmita finished before Sanchali but behind Mahika. Who came second in the race? एक दौड़ में पांच लड़कियों ने हिस्सा लिया। रजनी माहिका से पहले लेकिन गरिमा से पीछे है।अश्मिता सांची से पहले लेकिन माहिका से पीछे रह गई।दौड़ में दूसरे नंबर पर कौन आया?

Five subjects, R, T, V, X and Z, are taught from Monday to Friday (not necessarily in the same order). One subject is taught on one day. Only Z is taught before R. T is taught before X. T is not taught on Wednesday. How many subjects are taught before V? पांच विषयों, R, T, V, X और Z को सोमवार से शुक्रवार तक पढ़ाया जाता है (जरूरी नहीं कि उसी क्रम में)। एक दिन में एक विषय पढ़ाया जाता है। केवल R को T से पहले पढ़ाया जाता है। X को बुधवार को नहीं पढ़ाया जाता है। V के पहले कितने विषय पढ़ाए जाते हैं?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 23 उपयुक्त उस बल को न यद्यपि मृत्यु का भी दण्ड है, पर मृत्यु से बढ़कर न जग में दण्ड और प्रचण्ड है। अतएव कल उस नीच को रण-मध्य जो मारूँ न मै, तो सत्य कहता हूँ कभी शस्त्रास्त्र फिर धारूँ न मैं अथवा अधिक कहना वृथा है, पार्थ का प्रण है यही साक्षी रहे सुन ये बचन रवि, शशि, अनल, अम्बर मही सूर्यास्त से पहले न जो मैं कल जयद्रथ वध करूँ, तो शपथ करता हूँ स्वयं में ही अनल में जल मरूँ। " " मैथिलीशरण गुप्त 'खल' शब्द का विपरीतार्थक है।

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 23 उपयुक्त उस बल को न यद्यपि मृत्यु का भी दण्ड है, पर मृत्यु से बढ़कर न जग में दण्ड और प्रचण्ड है। अतएव कल उस नीच को रण-मध्य जो मारूँ न मै, तो सत्य कहता हूँ कभी शस्त्रास्त्र फिर धारूँ न मैं अथवा अधिक कहना वृथा है, पार्थ का प्रण है यही साक्षी रहे सुन ये बचन रवि, शशि, अनल, अम्बर मही सूर्यास्त से पहले न जो मैं कल जयद्रथ वध करूँ, तो शपथ करता हूँ स्वयं में ही अनल में जल मरूँ। " " मैथिलीशरण गुप्त 'वृथा' शब्द का समानार्थक है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 23 उपयुक्त उस बल को न यद्यपि मृत्यु का भी दण्ड है, पर मृत्यु से बढ़कर न जग में दण्ड और प्रचण्ड है। अतएव कल उस नीच को रण-मध्य जो मारूँ न मै, तो सत्य कहता हूँ कभी शस्त्रास्त्र फिर धारूँ न मैं अथवा अधिक कहना वृथा है, पार्थ का प्रण है यही साक्षी रहे सुन ये बचन रवि, शशि, अनल, अम्बर मही सूर्यास्त से पहले न जो मैं कल जयद्रथ वध करूँ, तो शपथ करता हूँ स्वयं में ही अनल में जल मरूँ। " " मैथिलीशरण गुप्त पार्थ की क्या प्रतिज्ञा है?