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व्यंग्य...

व्यंग्य

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जब नहीं था इंसान धरती पर थे जंगल जंगली जानवर, परिंदे इन्हीं सबके बीच उतरा इन्सान और घटने लगे जंगल जंगली जानवर, परिंदे इन्सान बढ़ने लगा बेतहाशा अब कहाँ जाते जंगल, जंगली जानवर, परिंदे प्रकृति किसी के साथ नहीं करती जाइन्साफी सभी के लिए बनाती है जगह सो अब इन्सनों के भीतर उतरने लगे हैं जंगल, जंगली जानवर और परिंदे कविता के अंत में क्या व्यंग्य किया गया है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 18 चौड़ी सड़क गली पतली थी दिन का समय घनी बदली थी रामदास उस दिन उदास था अन्त समय आ गया पास था उसे बता यह दिया गया था उसकी हत्या होगी। धीरे-धीरे चला अकेले सोचा साथ किसी को ले ले फिर रह गया, सड़क पर सब थे सभी मौन थे सभी निहत्ये सभी जानते थे यह उस दिन उसकी हत्या होगी। खड़ा हुआ वह बीच सड़क पर दोनों हाथ पेट पर रख कर सधे कदम रख करके आए लोग सिमट कर आँख गड़ाए लगे देखने उसको जिसकी तय था हत्या होगी। निकल गली से तब हत्यारा आया उसने नाम पुकारा हाथ तौलकर चाकू मारा छूटा लोहू का फव्वारा कहा नहीं था उसने आखिर उसकी हत्या होगी। सड़क पर हत्या होने में क्या व्यंग्य है?

कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। जब नहीं था इंसान धरती पर थे जंगल जंगली जानवर, परिंदे इन्हीं सबके बीच उतरा इन्सान और घटने लगे जंगल जंगली जानवर, परिंदे इन्सान बढ़ने लगा बेतहाशा अब कहाँ जाते जंगल, जंगली जानवर, परिंदे प्रकृति किसी के साथ नहीं करती नाइन्साफी सभी के लिए बनाती है जगह सो अब इन्सनों के भीतर उतरने लगे हैं जंगल, जंगली जानवर और परिंदे कविता के अंत में क्या व्यंग्य किया गया है?