Home
Class 7
SOCIAL SCIENCE
हमारे आस पास के बाजार |साप्ताहिक बाजार|O...

हमारे आस पास के बाजार |साप्ताहिक बाजार|OMR

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

दोहरान |क्या हमारे आस पास के पदार्थ शुद्ध है ?|शुद्ध पदार्थ |मिश्रण के प्रकार |विषमांगी मिश्रण |समांगी मिश्रण |मिश्रण |विलयन क्या है ?|सारांश |विलेय एवं विलायक

दोहरान |क्या हमारे आस पास के पदार्थ शुद्ध है ?|शुद्ध पदार्थ |मिश्रण के प्रकार |विषमांगी मिश्रण |समांगी मिश्रण |मिश्रण |विलयन क्या है ?|सारांश |विलेय एवं विलायक

दोहरान |क्या हमारे आस पास के पदार्थ शुद्ध है ?|शुद्ध पदार्थ |मिश्रण |मिश्रण के प्रकार |समांगी मिश्रण |विषमांगी मिश्रण |विलयन क्या है ?|विलेय एवं विलायक |सारांश

दोहरान |हमारे आस-पास की वस्तुएं |दीप्त पिंड |पारदर्शी वस्तु |अपारदर्शी वस्तु |पारभासी वस्तु |छाया का बनना |सारांश

इरोड का कपडा बाजार|प्रश्न|OMR

बाजार और उपभोक्ता|भारत में उपभोक्ता आंदोलन|सूचना पाने का अधिकार|चयन का अधिकार|क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार|OMR

शिक्षा आज दुविधा के अजब दोराहे पर खड़ी है। एक रास्ता चकाचौंध का है, मृगतृष्णा का है। बाजार की मृगतृष्णा शिक्षार्थी को - लोभ-लालच देकर अपनी तरफ दौड़ाते रहने को विवश करने को उतारू खड़ी है। बाजार के इनललचाने वाले रास्तों पर आकर्षण है, चकाचौंध है और सम्मोहित कर देने वाले सपने हैं। दूसरी तरफ शिक्षा का साधना मार्ग है जो शांति दे सकता है, संतोष दे सकता है और हमारे आत्मतत्त्व को प्रबल करता हुआ विमल विवेक दे सकता है। निश्चित ही वह मार्ग श्रेयस्कर है, मगर अपनी ओर आकर्षित करने वाले बाजार का मार्ग प्रेयस्कर है। इस दोराहे पर खड़ा शिक्षार्थी बाजार को चुन लेता है। लाखों-करोड़ों लोग आज इसी रास्ते के लालच में आ गए हैं और शिक्षा के भंवरजाल में फंस गए हैं। बाजार की खूबी यही है कि वह-फंसने का अहसास किसी को नहीं होने देता और मनुष्य लगातार फंसता चला जाता है। किसी को यह महसूस नहीं होता कि वह दलदल में हैं बल्कि महसूस यह होता है कि बाजार द्वारा दिए गए पैकेज के कारण वह सुखी है। अब यह अलग बात है कि सच्चा सुख क्या है? और सुख का भ्रम क्या है? जरूरत विचार करने की है। सवाल यह है कि बाजार विचार करने का भी अवकाश देता है या कि नहीं। गद्यांश के अनुसार लोग बाजार को चुनते हैं, क्योंकिः