Home
Class
DN_SHORTS
शहीद दिवस | क्या था 23 मार्च 1931 का राज...

शहीद दिवस | क्या था 23 मार्च 1931 का राज़ | A Tribute To The Martyrs | Shaheed Diwas #shorts

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

The ratio of present ages of A and B is 5 : 3. 9 years ago, the ratio of their ages was 23 : 12. What will be the ratio of their ages after 15 years ? A और B की वर्तमान आयु का अनुपात 5:3 है | 9 वर्ष पहले, उनकी आयु का जनुषपात 23:12 था| अब से 15 वर्ष बाद उनकी आयु का अनुपात क्या होगा?

In a row of students P was standing 17th from the left end and 23rd from the right end. If Q was standing exactly in the middle of the row, what was his position from the left end? (Assume students were facing the north.) छात्रों की एक पंक्ति में P, बाएं छोर से 17 वें और दाहिने छोर से 23 वें स्थान पर था। यदि Q पंक्ति के ठीक बीच में खड़ा था, तो बाएं छोर से उसकी स्थिति क्या थी? (मान लें कि छात्र उत्तर का सामना कर रहे थे।)

Before a battle there were the ratio of captains to soldiers was 2: 7. During the war 25 captains and 100 soldiers were martyred. The new ratio of captions to soldiers became 3 : 10. What is the number of soldiers after the war? युद्ध से पहले कैप्टन और सिपाहियों का अनुपात 2:7 था। युद्ध के दौरान और 25 कैप्टन और 100 सिपाही शहीद हुए। कैप्टन और सिपाहियों का नया अनुपात 3 : 10 हो गय।॥ युद्ध के बाद सिपाहियों की संख्या क्या होगी?

हमें स्वतंत्र हुए 15 वर्ष ही हुए थे कि पड़ोसी चीन ने हमारी पीठ में छुरा भोंक दिया। उत्तरी सीमा की सफेद बर्फीली चोटियाँ शहीदों के खून से सनकर लाल हो गई। हज़ारों माँओं की गोदें सूनी हुई. हज़ारों की माँग का सिंदूर पुंछ गया और लाखों अभागे बच्चे पिता के प्यार से वंचित हो गए। गणतंत्र दिवस निकट आ रहा था। देश का हौसला पस्त था। कोई उमग नहीं रह गई थी पर्व मनाने की। तब यह सोचा गया कि जानी-मानी फिल्मी हस्तियाँ आयोजन में शामिल हों तो भीड़ उमड़ेगी। वहाँ कोई ऐसा गीत प्रस्तुत हो जो लोगों के दिलों को छूकर उन्हें झकझोर सके। चुनौती फिल्म जगत तक पहुँची। एक नौजवान गीतकार प्रदीप ने चुनौती स्वीकारने का मन बनाया और गीत लिखना शुरू किया। लेकिन सुर और स्वर के बिना गीत का क्या! प्रदीप संगीत निर्देशक सी. रामचंद्र के पास पहुंचे। उन्हें गीत पंसद आया और रक्षा मंत्रालय को सूचना दे दी गई। 26 जनवरी का शुभ दिन आया। लाखों की भीड़ बड़ी उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रही थी। तब तक जो धुन बज रही थी वह हटी और थोड़ी देर शाति रही। तभी उस शांति को चीरता हुआ लता मंगेशकर का वेदना और चुनौती भरा स्वर सुनाई पड़ा -"ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आँख में भर लो पानी।" समय जैसे थम गया। सभी के मन एक ही भाव, एक ही रस में डूब गए। गीत समाप्त हुआ तो लगभग दो लाख लोग सिसक रहे थे। आँसू थे कि थमते ही न थे। देश का हौसला पस्त था, क्योंकि:

हमें स्वतंत्र हुए 15 वर्ष ही हुए थे कि पड़ोसी चीन ने हमारी पीठ में छुरा भोंक दिया। उत्तरी सीमा की सफेद बर्फीली चोटियाँ शहीदों के खून से सनकर लाल हो गई। हज़ारों माँओं की गोदें सूनी हुई. हज़ारों की माँग का सिंदूर पुंछ गया और लाखों अभागे बच्चे पिता के प्यार से वंचित हो गए। गणतंत्र दिवस निकट आ रहा था। देश का हौसला पस्त था। कोई उमग नहीं रह गई थी पर्व मनाने की। तब यह सोचा गया कि जानी-मानी फिल्मी हस्तियाँ आयोजन में शामिल हों तो भीड़ उमड़ेगी। वहाँ कोई ऐसा गीत प्रस्तुत हो जो लोगों के दिलों को छूकर उन्हें झकझोर सके। चुनौती फिल्म जगत तक पहुँची। एक नौजवान गीतकार प्रदीप ने चुनौती स्वीकारने का मन बनाया और गीत लिखना शुरू किया। लेकिन सुर और स्वर के बिना गीत का क्या! प्रदीप संगीत निर्देशक सी. रामचंद्र के पास पहुंचे। उन्हें गीत पंसद आया और रक्षा मंत्रालय को सूचना दे दी गई। 26 जनवरी का शुभ दिन आया। लाखों की भीड़ बड़ी उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रही थी। तब तक जो धुन बज रही थी वह हटी और थोड़ी देर शाति रही। तभी उस शांति को चीरता हुआ लता मंगेशकर का वेदना और चुनौती भरा स्वर सुनाई पड़ा -"ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आँख में भर लो पानी।" समय जैसे थम गया। सभी के मन एक ही भाव, एक ही रस में डूब गए। गीत समाप्त हुआ तो लगभग दो लाख लोग सिसक रहे थे। आँसू थे कि थमते ही न थे। रक्षा मंत्रालय को क्या सूचना दी गई होगी?

हमें स्वतंत्र हुए 15 वर्ष ही हुए थे कि पड़ोसी चीन ने हमारी पीठ में छुरा भोंक दिया। उत्तरी सीमा की सफेद बर्फीली चोटियाँ शहीदों के खून से सनकर लाल हो गई। हज़ारों माँओं की गोदें सूनी हुई. हज़ारों की माँग का सिंदूर पुंछ गया और लाखों अभागे बच्चे पिता के प्यार से वंचित हो गए। गणतंत्र दिवस निकट आ रहा था। देश का हौसला पस्त था। कोई उमग नहीं रह गई थी पर्व मनाने की। तब यह सोचा गया कि जानी-मानी फिल्मी हस्तियाँ आयोजन में शामिल हों तो भीड़ उमड़ेगी। वहाँ कोई ऐसा गीत प्रस्तुत हो जो लोगों के दिलों को छूकर उन्हें झकझोर सके। चुनौती फिल्म जगत तक पहुँची। एक नौजवान गीतकार प्रदीप ने चुनौती स्वीकारने का मन बनाया और गीत लिखना शुरू किया। लेकिन सुर और स्वर के बिना गीत का क्या! प्रदीप संगीत निर्देशक सी. रामचंद्र के पास पहुंचे। उन्हें गीत पंसद आया और रक्षा मंत्रालय को सूचना दे दी गई। 26 जनवरी का शुभ दिन आया। लाखों की भीड़ बड़ी उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रही थी। तब तक जो धुन बज रही थी वह हटी और थोड़ी देर शाति रही। तभी उस शांति को चीरता हुआ लता मंगेशकर का वेदना और चुनौती भरा स्वर सुनाई पड़ा -"ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आँख में भर लो पानी।" समय जैसे थम गया। सभी के मन एक ही भाव, एक ही रस में डूब गए। गीत समाप्त हुआ तो लगभग दो लाख लोग सिसक रहे थे। आँसू थे कि थमते ही न थे। 'मांग का सिंदूर पुंछ जाना' मुहावरे का अर्थ है:

Recommended Questions
  1. शहीद दिवस | क्या था 23 मार्च 1931 का राज़ | A Tribute To The Martyrs |...

    Text Solution

    |

  2. अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए - RX overset(KCN)(to) A overset(H+)(to) ...

    Text Solution

    |

  3. कपियो को मानव में बदलने के लिए कौन-से परिवर्तन करने की आवश्यकता होगी?

    Text Solution

    |

  4. एक 220 वोल्ट- 100 वाट का बल्ब 110 वोल्ट के स्त्रोत से जुड़ा हैं।...

    Text Solution

    |

  5. धारामापी को वोल्टमीटर में कैसे बदला जा सकता है?

    Text Solution

    |

  6. चित्रानुसार एक दण्ड चुम्बक मुक्त रूप से एक कुण्डली के बीच से होकर गिरत...

    Text Solution

    |

  7. किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक 0.3xx10^(-4)" ...

    Text Solution

    |

  8. सामान्य ताप पर Na bcc जालक में क्रिस्टलीकृत होता है जिसके लिए a = 4.24...

    Text Solution

    |

  9. एक धातु का fcc जालक है । एकक कोष्ठिका के किनारे की लम्बाई 404 pm है । ...

    Text Solution

    |