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SOCIAL SCIENCE
नेपोलियन|नेपोलियन को लेकर जनता की प्रतिक...

नेपोलियन|नेपोलियन को लेकर जनता की प्रतिक्रिया

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राष्ट्रवाद|यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय|फ्रांसीसी क्रांति|राष्ट्र की भावना की रचना|नेपोलियन|जनता की प्रतिक्रिया|क्रांति के पहले की स्थिति|OMR

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नेपोलियन |जनता की प्रतिक्रिया |क्रांति के पहले की स्थिति |OMR

निर्देशः कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। सदियों की ठंडी-बुझी राख सुगबुगा उठी मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है, दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो सिहासन खाली करो कि जनता आती है। जनता, हाँ, मिट्टी की अबोध मूरतें वही, जाड़े-पाले की कसक सदा सहने वाली जब अंग-अंग में लगे साँप हों चूस रहे, तब भी न कभी मुँह खोल दर्द कहने वाली| वाक्य में किस जनता की ओर संकेत किया गया है ?