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लक्ष्य की प्राप्ति तभी होगी जब नीव मज़बूत...

लक्ष्य की प्राप्ति तभी होगी जब नीव मज़बूत होगी

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चमकीली है सुबह आज की आसमान में निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी बेचैनी की बाँहों में कल फल खिलेंगे घुटन गमकती साँसों की आवाज सुनेगी। कुंठाओं की टहनी छिन्न-भिन्न होगी फिर आशा अपने हाथों से अब कुसुम चुनेगी, चटकीली है आज चहकती हुई चाँदनी कल चंदा की किरण और चटकीली होगी खुल जाएँगे अब सबके दिल के दरवाजे आँखें अपनी आँखों को पहचान सकेंगी। 'कुंठाओं की टहनी छिन्न-भिन्न होगी' से तात्पर्य है -

चमकीली है सुबह आज की आसमान में निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी बेचैनी की बाँहों में कल फल खिलेंगे घुटन गमकती साँसों की आवाज सुनेगी। कुंठाओं की टहनी छिन्न-भिन्न होगी फिर आशा अपने हाथों से अब कुसुम चुनेगी, चटकीली है आज चहकती हुई चाँदनी कल चंदा की किरण और चटकीली होगी खुल जाएँगे अब सबके दिल के दरवाजे आँखें अपनी आँखों को पहचान सकेंगी। काव्यांश में 'चमकीली सुबह का आशय है।

चमकीली है सुबह आज की आसमान में निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी बेचैनी की बाँहों में कल फल खिलेंगे घुटन गमकती साँसों की आवाज सुनेगी। कुंठाओं की टहनी छिन्न-भिन्न होगी फिर आशा अपने हाथों से अब कुसुम चुनेगी, चटकीली है आज चहकती हुई चाँदनी कल चंदा की किरण और चटकीली होगी खुल जाएँगे अब सबके दिल के दरवाजे आँखें अपनी आँखों को पहचान सकेंगी। कवि को विश्वास है कि

चमकीली है सुबह आज की आसमान में निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी बेचैनी की बाँहों में कल फल खिलेंगे घुटन गमकती साँसों की आवाज सुनेगी। कुंठाओं की टहनी छिन्न-भिन्न होगी फिर आशा अपने हाथों से अब कुसुम चुनेगी, चटकीली है आज चहकती हुई चाँदनी कल चंदा की किरण और चटकीली होगी खुल जाएँगे अब सबके दिल के दरवाजे आँखें अपनी आँखों को पहचान सकेंगी। 'चाँदनी' का विशेषण है

चमकीली है सुबह आज की आसमान में निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी बेचैनी की बाँहों में कल फल खिलेंगे घुटन गमकती साँसों की आवाज सुनेगी। कुंठाओं की टहनी छिन्न-भिन्न होगी फिर आशा अपने हाथों से अब कुसुम चुनेगी, चटकीली है आज चहकती हुई चाँदनी कल चंदा की किरण और चटकीली होगी खुल जाएँगे अब सबके दिल के दरवाजे आँखें अपनी आँखों को पहचान सकेंगी। 'कुसुम' का पर्यायवाची शब्द नहीं है

निर्देशः कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। चमकीली है सुबह आज की आसमान में निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी बेचैनी की बाँहों में कल फूल खिलेंगे घुटन गमकती साँसों की आवाज सुनेगी। कुंठाओं की टहनी छिन्न-भिन्न होगी फिर आशा अपने हाथों से अब कुसुम चुनेगी, चटकीली है आज चहकती हुई चाँदनी कल चंदा की किरण और चटकीली होगी खुल जाएँगे अब सबके दिल के दरवाजे आँखें अपनी आँखों को पहचान सकेंगी। 'दिल के दरवाजे खुल जाएँगे' का क्या अर्थ है ?