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गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। मेरी कल्पना के सुन्दर स्वप्नों का प्रभात हो रहा है। नाचती हुई नीहार कणिकाओं पर तीखी किरणों के भाले ! ओह 1 सोचा था कि देवता जायेंगे, एक बार आर्यावर्त में गौरव का सूर्य चमकेगा और पुण्य कर्मों से समस्त पाप-पंक घो जायेंगे। हिमालय से निकलती हुई सप्त सिन्धु तथा गंगा-यमुना की घाटियाँ किसी आर्य सद्गृहस्थ के स्वच्छ और पवित्र आंगन-सी भूखी जाति के निर्वासित प्राणियों को अन्नदान देकर संतुष्ट करेंगी और आर्य जाति अपने दृढ़ सबल हाथों में शस्त्र ग्रहण करके पुण्य का पुरस्कार और पाप का तिरस्कार करती हुई, अचल हिमाचल की भांति सिर ऊँचा किये, विश्व को सदाचरण के लिए सावधान करती रहेगी, आलस्य-सिन्धु में शेष पर्यकशायी सुषुपत्ति नाथ जायेंगे। विश्व को सदाचरण के लिए कौन सावधान करती रहेगी।

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। मेरी कल्पना के सुन्दर स्वप्नों का प्रभात हो रहा है। नाचती हुई नीहार कणिकाओं पर तीखी किरणों के भाले ! ओह 1 सोचा था कि देवता जायेंगे, एक बार आर्यावर्त में गौरव का सूर्य चमकेगा और पुण्य कर्मों से समस्त पाप-पंक घो जायेंगे। हिमालय से निकलती हुई सप्त सिन्धु तथा गंगा-यमुना की घाटियाँ किसी आर्य सद्गृहस्थ के स्वच्छ और पवित्र आंगन-सी भूखी जाति के निर्वासित प्राणियों को अन्नदान देकर संतुष्ट करेंगी और आर्य जाति अपने दृढ़ सबल हाथों में शस्त्र ग्रहण करके पुण्य का पुरस्कार और पाप का तिरस्कार करती हुई, अचल हिमाचल की भांति सिर ऊँचा किये, विश्व को सदाचरण के लिए सावधान करती रहेगी, आलस्य-सिन्धु में शेष पर्यकशायी सुषुपत्ति नाथ जायेंगे। प्रस्तुत गद्यांश में किस प्रकार के सुन्दर स्वप्नों का प्रभात हो रहा है।

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। मेरी कल्पना के सुन्दर स्वप्नों का प्रभात हो रहा है। नाचती हुई नीहार कणिकाओं पर तीखी किरणों के भाले ! ओह 1 सोचा था कि देवता जायेंगे, एक बार आर्यावर्त में गौरव का सूर्य चमकेगा और पुण्य कर्मों से समस्त पाप-पंक घो जायेंगे। हिमालय से निकलती हुई सप्त सिन्धु तथा गंगा-यमुना की घाटियाँ किसी आर्य सद्गृहस्थ के स्वच्छ और पवित्र आंगन-सी भूखी जाति के निर्वासित प्राणियों को अन्नदान देकर संतुष्ट करेंगी और आर्य जाति अपने दृढ़ सबल हाथों में शस्त्र ग्रहण करके पुण्य का पुरस्कार और पाप का तिरस्कार करती हुई, अचल हिमाचल की भांति सिर ऊँचा किये, विश्व को सदाचरण के लिए सावधान करती रहेगी, आलस्य-सिन्धु में शेष पर्यकशायी सुषुपत्ति नाथ जायेंगे। गौरव का सूर्य कहाँ चमकेगा?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। मेरी कल्पना के सुन्दर स्वप्नों का प्रभात हो रहा है। नाचती हुई नीहार कणिकाओं पर तीखी किरणों के भाले ! ओह 1 सोचा था कि देवता जायेंगे, एक बार आर्यावर्त में गौरव का सूर्य चमकेगा और पुण्य कर्मों से समस्त पाप-पंक घो जायेंगे। हिमालय से निकलती हुई सप्त सिन्धु तथा गंगा-यमुना की घाटियाँ किसी आर्य सद्गृहस्थ के स्वच्छ और पवित्र आंगन-सी भूखी जाति के निर्वासित प्राणियों को अन्नदान देकर संतुष्ट करेंगी और आर्य जाति अपने दृढ़ सबल हाथों में शस्त्र ग्रहण करके पुण्य का पुरस्कार और पाप का तिरस्कार करती हुई, अचल हिमाचल की भांति सिर ऊँचा किये, विश्व को सदाचरण के लिए सावधान करती रहेगी, आलस्य-सिन्धु में शेष पर्यकशायी सुषुपत्ति नाथ जायेंगे। आर्य जाति अपने हाथों में क्या ग्रहण कर पाप का तिरस्कार करती है?