Home
Class
DN_SHORTS
car के एयर बैग इस तरह से जान बचाते हैं |...

car के एयर बैग इस तरह से जान बचाते हैं || How car airbags work ? #shorts

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

The bar graph shows the exports of Cars of Type A and B (in Rs millions). यह दंड आरेख A और B प्रकार की कारों का निर्यात ( दस लाख रुपये में) दर्शाता है | The total exports of cars of type A in 2014 to 2017 is approximately what percentage less than the total exports of cars of type B in 2015 to 2018? A प्रकार की कारों का 2014 से 2017 तक कुल निर्यात B प्रकार की कारों के 2015 से 2018 तक के कुल निर्यात से लगभग कितना प्रतिशत कम है ?

The table shows the production of different types of cars (in thousands). यह तालिका एक कंपनी द्वारा अलग-अलग कारों के उत्पादन ( हज़ार में ) को दर्शाती है | The ratio of the total production of type A cars in 2014 and 2016 and type C cars in 2013 taken together to the total production of type B cars and type D cars taken together in 2014 is: 2014 तथा 2016 में A प्रकार एवं 2013 में C प्रकार की कारों के कुल उत्पादन ( संयुक्त रूप से ) का 2014 में B प्रकार और D प्रकार की कारों के कुल उत्पादन के साथ अनुपात ज्ञात करें |

The table shows the production of different types of cars (in thousands). यह तालिका अलग-अलग प्रकार के कारों का उत्पादन ( हज़ार में) दर्शाती है | If the data related to the production of cars of type E is represented by a pie chart, then the central angle of the sector representing the data of production of cars in 2013 will be: यदि E प्रकार की कारों के उत्पादन से संबंधित आंकड़ों को एक पाई-चार्ट के द्वारा प्रदर्शित किया जाए, तो 2013 में कारों के उत्पादन के आंकड़ों को दर्शाने वाले खंड का केंद्रीय कोण होगा :

The table shows the production of different types of cars (in thousands). यह तालिका एक कंपनी द्वारा अलग-अलग कारों के उत्पादन (हज़ार में ) को दर्शाती है | What is the ratio of the total production of type B cars in 2011 and type E cars in 2013 taken together to the total production of type C cars in 2014 and type D cars in 2012 taken together? 2011 में B प्रकार एवं 2013 में E प्रकार की कारों के कुल उत्पादन ( संयुक्त रूप से ) का 2014 में C प्रकार और 2012 में D प्रकार की कारों के कुल उत्पादन के साथ अनुपात ज्ञात करें |

The table shows the production of different types of cars (in thousands). यह तालिका एक कंपनी द्वारा अलग-अलग कारों के उत्पादन (हज़ार में ) को दर्शाती है | The average production of cars in 2018 is approximately what percent less than the total production of type D cars in 2015 and type B cars in 2017 taken together? 2018 में कारों का औसत उत्पादन 2015 में D प्रकार और 2017 में B प्रकार की कारों के कुल उत्पादन से लगभग कितना प्रतिशत कम है ?

The table shows the production of different types of cars (in thousands) यह तालिका अलग-अलग प्रकार के कारों का उत्पादन ( हज़ार में ) दर्शाती है | If the data regarding the production of cars of type B is represented by a pie-chart, then the angle of the sector representing the production of cars in 2016 will be: यदि B प्रकार की कारों के उत्पादन से संबंधित आंकड़ों को एक पाई-चार्ट के द्वारा प्रस्तुत किया जाए, तो 2016 में करों के उत्पादन को दर्शाने वाले खंड का कोण होगा :

चेन्नई में आई बाढ़ अब उतार पर है। इस त्रासदी से निबटने में इस शहर ने जिस साहस का परिचय दिया, जिस तरह से सोशल मीडिया ने एक बार फिर बचाव के काम में अहम किरदार निभाया, बल्कि कुछ मामलों में तो जान बचाने में भी उसकी भूमिका रही, इसे देखते हुए उसकी जितनी तारीफ की जाए, वह कम है। इन तमाम अच्छी बातों के बावजूद इस वास्तविकता को भी नहीं झूठलाया जा सकता कि इस त्रासदी से बचा जा सकता था। चेन्नई में आई बाढ़ की असली वजह थी अडयार नदी-बेसिन का नए हवाई अड्डे के लिए अतिक्रमण। ठीक उसी तरह, जैसे दूसरे नदी विस्तारों का आवासीय निर्माण के लिए इस्तेमाल कर लिया गया है। नदी के कुदरती रास्तों को अवरूद्ध किए जाने से इसका जल आसपास के इलाकों में उमड़ गया। जब तक प्रकृति अपना क्रोध नहीं दिखाती, हमारे योजनाकार हर जोखिम को नजरअंदाज़ करते रहते हैं और उस चीज की तलाश में रहते हैं, जिसे वे ले सकते हैं। हमने इसी तरह का विध्वंसक सैलाब मुंबई में भी देखा। कुछ समय पहले श्रीनगर में भी ऐसी ही बर्बादी देखी। हर जगह मुख्य वजह मिली। अनियोजित शहरीकरण और बुनियादी नियमों की अनदेखीं। फिर भी हर बार त्रासदी की गंभीरता लोगों की यादों में धुंधली पड़ जाती है। चेनई की तरह दिल्ली में भी ऐसे सैलाब की संभावना है। इसलिए हमें यमुना नदी के बेसिन से छेड़छाड़ करने की 'बुद्धिमानी' से बचना होगा। मुंबई, श्रीनगर जैसे स्थानों में बाढ़ से हुई बरबादी के पीछे कारण था

चेन्नई में आई बाढ़ अब उतार पर है। इस त्रासदी से निबटने में इस शहर ने जिस साहस का परिचय दिया, जिस तरह से सोशल मीडिया ने एक बार फिर बचाव के काम में अहम् किरदार निभाया, बल्कि कुछ मामलों में तो जान बचाने में भी उसकी भूमिका रही, इसे देखते हुए उसकी जितनी तारीफ की जाए, वह कम है। इन तमाम अच्छी बातों के बावजूद इस वास्तविकता को भी नहीं झुठलाया जा सकता कि इस त्रसादी से बचा जा सकता था। चेन्नई में आई बाढ़ की असली वजह थी अडयार नदी-बेसिन का नए हवाई अड्डे के लिए अतिक्रमण। ठीक उसी तरह, जैसे दूसरे नदी विस्तारों का आवासीय निर्माण के लिए प्रयोग कर लिया गया है। नदी के कुदरती रास्तों को अवरुद्ध किए जाने से इसका जल आस-पास के इलाकों में उमड़ गया। जब तक प्रकृति अपना क्रोध नहीं दिखाती, हमारे योजनाकार हर जोखिम को नजरअन्दाज करते रहते हैं और उस चीज की तलाश में रहते हैं, जिसे वे ले सकते हैं। हमने इसी तरह का विध्वंसक सैलाब मुम्बई में भी देखा। कुछ ही समय पहले श्रीनगर में भी ऐसी ही बरबादी देखी। हर जगह मुख्य वजह मिली-अनियोजित शहरीकरण और बुनियादी नियमों की अनदेखी। फिर भी हर बार त्रासदी की गम्भीरता लोगों की यादों में धुंधली पड़ जाती है। चेन्नई की तरह दिल्ली में भी ऐसे सैलाब की सम्भावना है। इसलिए हमें यमुना नदी के बेसिन से छेड़छाड़ करने की 'बुद्धिमानी' से बचना होगा। मुम्बई, श्रीनगर जैसे स्थानों में बाढ़ से हुई बरबादी के पीछे कारण था