अपने आप को भी माफ़ करें |MISTAKES & REGRET | Forgive | #AShortADay #vedantu #shorts
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सिद्धार्थ की माँ ने अपने परिवार के सदस्यों से अनुरोध किया है कि वे घर में एक ही भाषा का प्रयोग करें। जिससे कि सिद्धार्थ का भाषाई विकास ठीक से हो सके। उनके बारे में आप क्या कहोंगे?
बच्चे और खिलौने का सम्बन्ध सदैव से ही रहा है। हम यह भी कह सकते हैं कि खिलौनों के बिना हम बच्चों की दुनिया की कल्पना भी नहीं कर सकते। चाहे हम बच्चों को खिलौने खरीदकर दें या न दें, बच्चे अपने लिए किसी-न-किसी चीज (चाहे वे टूटे-फूटे डिब्बे हों या इसी तरह की अन्य सामग्री) को खिलौने की शक्ल दे ही देते हैं। बच्चों को एकदम छुटपन से ही मुँह से या खिलौनों से अजीबों गरीब आवाजें निकालकर हम बहलाते हैं और बच्चे बहल भी जाते हैं। यही बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते हैं, खुद भी चीजों को जोड़-तोड़कर खिलौने बनाने में अपनी रचनात्मक ऊर्जा का खूब इस्तेमाल करते हैं। इसलिए भी यह जरूरी हो जाता है कि बच्चों की इस रचनात्मक ऊर्जा को उभारने के लिए उन्हें भरपूर मौके दिए जाएँ। पहले हम गौर करें कि बच्चे अपने रोजमर्रा के जीवन में कौन-कौन-सी चीजें बनाते हैं? इसके लिए अगर हम अपने अतीत में गोता लगाएँ और अपने बचपन की दुनिया में झाँके, तो तरह-तरह के खिलौनों का खजाना हमारी स्मृति में से निकलकर आता है-ढेर सारी माचिस की खाली डिब्बियों को बिल्कुल सरल तरीके से जोड़कर बनती रेलगाड़ी, कागज से बनाई जाने वाली ढेरों चीजें जैसे नाव, हवाई जहाज, तितली, नाग आदि क्या-क्या नहीं बनाते थे इन सब से। बच्चों की रचनात्मक ऊर्जा को उभारने के लिए