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दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 13 आम की थी डॉल हरियल में मगनमन झूमता था कई पल्लव और भी थे, उन्हें जी भर घूमता था। देख मेरा हरा यौवन मुस्कुराती नित्य डाली गीत से मन जीत लेते कभी कोयल, कभी माली बाग बस्ती में अचानक हुआ मेरा रंग पीला खिलखिलाना बन्द, बजना बन्द, यह तन पड़ा ढीला। हवा ने ऐसा हिलाया डाल का भी साथ छूटा रह गया परिवार पीछे, एक पल्लव हाया टूटा। जब हवा की गोद में कुछ दूर बगिया से बहा देवता हो तुम पवन मेरी सुनो मैने कहा। जन्मभूमि बाग मेरी मूल माँ के चरण चूमूँ खाद बनकर करूँ सेवा फिर किसी डाली पे झूमूँ पवन की करुणा-कृपा से बाग में उड़ लौट आया वृक्ष के चरणों में पल्लव खाद बनकर मुस्कुराया। 'आम की हरियल डाली' किसकी प्रतीक है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 13 आम की थी डॉल हरियल में मगनमन झूमता था कई पल्लव और भी थे, उन्हें जी भर घूमता था। देख मेरा हरा यौवन मुस्कुराती नित्य डाली गीत से मन जीत लेते कभी कोयल, कभी माली बाग बस्ती में अचानक हुआ मेरा रंग पीला खिलखिलाना बन्द, बजना बन्द, यह तन पड़ा ढीला। हवा ने ऐसा हिलाया डाल का भी साथ छूटा रह गया परिवार पीछे, एक पल्लव हाया टूटा। जब हवा की गोद में कुछ दूर बगिया से बहा देवता हो तुम पवन मेरी सुनो मैने कहा। जन्मभूमि बाग मेरी मूल माँ के चरण चूमूँ खाद बनकर करूँ सेवा फिर किसी डाली पे झूमूँ पवन की करुणा-कृपा से बाग में उड़ लौट आया वृक्ष के चरणों में पल्लव खाद बनकर मुस्कुराया। 'रह गया परिवार पीछे' में परिवार किसे कहा गया है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 13 आम की थी डॉल हरियल में मगनमन झूमता था कई पल्लव और भी थे, उन्हें जी भर घूमता था। देख मेरा हरा यौवन मुस्कुराती नित्य डाली गीत से मन जीत लेते कभी कोयल, कभी माली बाग बस्ती में अचानक हुआ मेरा रंग पीला खिलखिलाना बन्द, बजना बन्द, यह तन पड़ा ढीला। हवा ने ऐसा हिलाया डाल का भी साथ छूटा रह गया परिवार पीछे, एक पल्लव हाया टूटा। जब हवा की गोद में कुछ दूर बगिया से बहा देवता हो तुम पवन मेरी सुनो मैने कहा। जन्मभूमि बाग मेरी मूल माँ के चरण चूमूँ खाद बनकर करूँ सेवा फिर किसी डाली पे झूमूँ पवन की करुणा-कृपा से बाग में उड़ लौट आया वृक्ष के चरणों में पल्लव खाद बनकर मुस्कुराया। बिछड़े पत्ते की चाह क्या थी?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 13 आम की थी डॉल हरियल में मगनमन झूमता था कई पल्लव और भी थे, उन्हें जी भर घूमता था। देख मेरा हरा यौवन मुस्कुराती नित्य डाली गीत से मन जीत लेते कभी कोयल, कभी माली बाग बस्ती में अचानक हुआ मेरा रंग पीला खिलखिलाना बन्द, बजना बन्द, यह तन पड़ा ढीला। हवा ने ऐसा हिलाया डाल का भी साथ छूटा रह गया परिवार पीछे, एक पल्लव हाया टूटा। जब हवा की गोद में कुछ दूर बगिया से बहा देवता हो तुम पवन मेरी सुनो मैने कहा। जन्मभूमि बाग मेरी मूल माँ के चरण चूमूँ खाद बनकर करूँ सेवा फिर किसी डाली पे झूमूँ पवन की करुणा-कृपा से बाग में उड़ लौट आया वृक्ष के चरणों में पल्लव खाद बनकर मुस्कुराया। 'हरियल' शब्द का अर्थ है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 13 आम की थी डॉल हरियल में मगनमन झूमता था कई पल्लव और भी थे, उन्हें जी भर घूमता था। देख मेरा हरा यौवन मुस्कुराती नित्य डाली गीत से मन जीत लेते कभी कोयल, कभी माली बाग बस्ती में अचानक हुआ मेरा रंग पीला खिलखिलाना बन्द, बजना बन्द, यह तन पड़ा ढीला। हवा ने ऐसा हिलाया डाल का भी साथ छूटा रह गया परिवार पीछे, एक पल्लव हाया टूटा। जब हवा की गोद में कुछ दूर बगिया से बहा देवता हो तुम पवन मेरी सुनो मैने कहा। जन्मभूमि बाग मेरी मूल माँ के चरण चूमूँ खाद बनकर करूँ सेवा फिर किसी डाली पे झूमूँ पवन की करुणा-कृपा से बाग में उड़ लौट आया वृक्ष के चरणों में पल्लव खाद बनकर मुस्कुराया। 'मैं' किसका प्रतीक है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 13 आम की थी डॉल हरियल में मगनमन झूमता था कई पल्लव और भी थे, उन्हें जी भर घूमता था। देख मेरा हरा यौवन मुस्कुराती नित्य डाली गीत से मन जीत लेते कभी कोयल, कभी माली बाग बस्ती में अचानक हुआ मेरा रंग पीला खिलखिलाना बन्द, बजना बन्द, यह तन पड़ा ढीला। हवा ने ऐसा हिलाया डाल का भी साथ छूटा रह गया परिवार पीछे, एक पल्लव हाया टूटा। जब हवा की गोद में कुछ दूर बगिया से बहा देवता हो तुम पवन मेरी सुनो मैने कहा। जन्मभूमि बाग मेरी मूल माँ के चरण चूमूँ खाद बनकर करूँ सेवा फिर किसी डाली पे झूमूँ पवन की करुणा-कृपा से बाग में उड़ लौट आया वृक्ष के चरणों में पल्लव खाद बनकर मुस्कुराया। 'यौवन' शब्द का विलोम लिखिए

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 9 मैं तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो! हैं फूल रोकते, काँटे मुझे चलाते मरुस्थल, पहाड़ चलने की चाह बढ़ाते सच कहता हूँ मुश्किलें न जब होती हैं फूलों से मग आसान नहीं होता है रुकने से पग गतिवान नहीं होता है अवरोध नहीं, तो सम्भव नहीं प्रगति भी मेरे पग तब चलने में भी शरमाते मेरे संग चलने लगें हवाएँ जिससे तुम पथ के कण-कण को तूफान करो। में तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो। है नाश जहाँ निर्माण वहीं होता है। मैं बसा सकूँ नव स्वर्ग धरा पर जिससे तुम मेरी हर बस्ती वीरान करो। 'अवरोध' शब्द का समानार्थक है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 9 मैं तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो! हैं फूल रोकते, काँटे मुझे चलाते मरुस्थल, पहाड़ चलने की चाह बढ़ाते सच कहता हूँ मुश्किलें न जब होती हैं फूलों से मग आसान नहीं होता है रुकने से पग गतिवान नहीं होता है अवरोध नहीं, तो सम्भव नहीं प्रगति भी मेरे पग तब चलने में भी शरमाते मेरे संग चलने लगें हवाएँ जिससे तुम पथ के कण-कण को तूफान करो। में तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो। है नाश जहाँ निर्माण वहीं होता है। मैं बसा सकूँ नव स्वर्ग धरा पर जिससे तुम मेरी हर बस्ती वीरान करो। कवि को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 9 मैं तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो! हैं फूल रोकते, काँटे मुझे चलाते मरुस्थल, पहाड़ चलने की चाह बढ़ाते सच कहता हूँ मुश्किलें न जब होती हैं फूलों से मग आसान नहीं होता है रुकने से पग गतिवान नहीं होता है अवरोध नहीं, तो सम्भव नहीं प्रगति भी मेरे पग तब चलने में भी शरमाते मेरे संग चलने लगें हवाएँ जिससे तुम पथ के कण-कण को तूफान करो। में तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो। है नाश जहाँ निर्माण वहीं होता है। मैं बसा सकूँ नव स्वर्ग धरा पर जिससे तुम मेरी हर बस्ती वीरान करो। यदि मार्ग में बाधाएँ नहीं आती तो

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 9 मैं तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो! हैं फूल रोकते, काँटे मुझे चलाते मरुस्थल, पहाड़ चलने की चाह बढ़ाते सच कहता हूँ मुश्किलें न जब होती हैं फूलों से मग आसान नहीं होता है रुकने से पग गतिवान नहीं होता है अवरोध नहीं, तो सम्भव नहीं प्रगति भी मेरे पग तब चलने में भी शरमाते मेरे संग चलने लगें हवाएँ जिससे तुम पथ के कण-कण को तूफान करो। में तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो। है नाश जहाँ निर्माण वहीं होता है। मैं बसा सकूँ नव स्वर्ग धरा पर जिससे तुम मेरी हर बस्ती वीरान करो। कवि धरती पर क्या बसाना चाहता है?